केरल की राजनीति में एक बार फिर जांच एजेंसियां और राजनीतिक आरोप आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं। इस बार मामला राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केरल में पूर्व मुख्यमंत्री के आवास समेत कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसके बाद राज्य की राजनीति अचानक गरमा गई। कार्रवाई के कुछ ही घंटों के भीतर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सीपीएम के महासचिव एम ए बेबी ने इस कार्रवाई को सिर्फ कानूनी जांच नहीं, बल्कि "राजनीति से प्रेरित कदम" बताया। दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने इसे "घृणित हमला" तक करार दिया। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई किसी वित्तीय जांच से ज्यादा राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है। दूसरी तरफ ED का कहना है कि कार्रवाई एक चल रही धनशोधन जांच का हिस्सा है और एजेंसी कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है।
आखिर किस मामले ने विजयन परिवार तक पहुंचाई जांच?
पूरा मामला कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) और पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी टी वीणा की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस से जुड़ा है। ED की जांच के मुताबिक आरोप है कि 2017 से 2020 के बीच CMRL ने टी वीणा की कंपनी को लगभग 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि भुगतान तो हुआ, लेकिन उसके बदले कोई वास्तविक सेवा नहीं दी गई। यानी ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं यह भुगतान केवल कागजों पर दिखाया गया लेन-देन तो नहीं था। इसी आधार पर एजेंसी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। यही वह बिंदु है जिसने इस पूरे मामले को सिर्फ कारोबारी जांच से निकालकर सीधे राजनीतिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है, क्योंकि जांच अब पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े लोगों तक पहुंच चुकी है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अचानक तेज हुई कार्रवाई
इस पूरी कार्रवाई का समय भी राजनीतिक बहस की बड़ी वजह बन गया है। दरअसल, छापेमारी से ठीक एक दिन पहले केरल हाईकोर्ट ने CMRL की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने ED की कार्रवाई रोकने की मांग की थी। कंपनी चाहती थी कि एजेंसी की जांच को रद्द किया जाए, लेकिन अदालत ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। अदालत के फैसले के बाद ED को जांच आगे बढ़ाने का रास्ता साफ मिला और अगले ही दिन राज्य के कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू हो गई। यहीं से राजनीतिक सवाल भी उठने लगे। विपक्षी दलों और सीपीएम नेताओं ने कार्रवाई के समय और तरीके पर सवाल खड़े किए, जबकि एजेंसी का पक्ष है कि जांच अदालत की अनुमति और कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रही है।
CPM का पलटवार: 'डरने वालों में नहीं हैं विजयन'
छापेमारी के बाद सीपीएम ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। पार्टी महासचिव एम ए बेबी ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से न पार्टी डरने वाली है और न ही पिनराई विजयन। उन्होंने विजयन के पुराने राजनीतिक संघर्षों का भी जिक्र किया। बेबी ने कहा कि आपातकाल के दौर में जब पिनराई विजयन विधायक थे, तब उन्हें गिरफ्तार किया गया था और पुलिस की बर्बरता का सामना करना पड़ा था। उनका कहना था कि जिन्होंने राजनीतिक संघर्षों के इतने कठिन दौर देखे हों, वे ऐसी जांचों से डरने वाले नहीं हैं। बेबी ने यह भी कहा कि माकपा जनता के बीच जाकर बताएगी कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है।
कांग्रेस पर भी उठे सवाल, आखिर क्यों आया UDF का नाम?
इस पूरे विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब एम ए बेबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इस कार्रवाई में कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की भी कोई भूमिका है? उन्होंने दावा किया कि मीडिया रिपोर्टों में मौजूदा मुख्यमंत्री वी डी सतीशन के मंत्रिमंडल के दो मंत्रियों के नाम भी CMRL से जुड़े कथित लेन-देन में सामने आए थे और उनकी भी जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों पर आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे साफ है कि मामला अब केवल ED बनाम CPM तक सीमित नहीं रहा। राजनीतिक रूप से इसका दायरा और बड़ा होता दिखाई दे रहा है।
केरल में ED और राजनीति का पुराना टकराव
केरल में यह पहली बार नहीं है जब जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले भी सोना तस्करी मामला, लाइफ मिशन केस और कई अन्य मामलों में ED की कार्रवाई के बाद सियासी आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं। CPM लंबे समय से आरोप लगाती रही है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के लिए किया जाता है। दूसरी ओर केंद्र सरकार और एजेंसियां लगातार यह कहती रही हैं कि जांच कानून और सबूतों के आधार पर होती है।
अब नजर जांच पर नहीं, राजनीति पर भी
फिलहाल मामला कानूनी जांच के दायरे में है और ED अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। लेकिन केरल की राजनीति में इसकी गूंज जांच से कहीं आगे तक जाती दिखाई दे रही है। क्योंकि जब किसी पूर्व मुख्यमंत्री, उनके परिवार और सत्ताधारी दल का नाम सामने आता है, तो मामला सिर्फ कानून का नहीं रह जाता, बल्कि राजनीति का बड़ा मुद्दा भी बन जाता है। आने वाले दिनों में जांच किस दिशा में बढ़ती है और क्या एजेंसी के दावे मजबूत सबूतों तक पहुंचते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि यह मामला केरल की राजनीति में कितनी बड़ी हलचल पैदा करता है।
