दुनियाभर के मुसलमानों के लिए ईद-उल-अजहा यानी बकरीद सबसे अहम त्योहारों में से एक माना जाता है। यह त्योहार कुर्बानी, त्याग और अल्लाह के प्रति समर्पण का संदेश देता है। हर साल की तरह इस बार भी लोगों के बीच यह कन्फ्यूजन बना हुआ था कि भारत में बकरीद 27 मई को होगी या 28 मई को। अब चांद की स्थिति और इस्लामिक कैलेंडर के आधार पर भारत में बकरीद की तारीख स्पष्ट हो गई है। देशभर में 28 मई 2026 को ईद-उल-अजहा मनाई जाएगी।
भारत में कब मनाई जाएगी बकरीद?
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार बकरीद जिलहिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। भारत में 18 मई को जिलहिज्जा का चांद दिखाई दिया था, जिसके बाद 19 मई से इस महीने की शुरुआत मानी गई। इसी हिसाब से 10 जिलहिज्जा की तारीख 28 मई 2026 को पड़ रही है।
ऐसे में भारत में गुरुवार, 28 मई को बकरीद मनाई जाएगी। इसी दिन मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज अदा की जाएगी और कुर्बानी की रस्म निभाई जाएगी। कई राज्यों में इस दिन सरकारी छुट्टी भी घोषित की गई है, जिसके चलते स्कूल, कॉलेज, बैंक और सरकारी दफ्तर बंद रह सकते हैं।
सऊदी अरब में एक दिन पहले होगी ईद
अक्सर सऊदी अरब में इस्लामिक त्योहार भारत से एक दिन पहले मनाए जाते हैं। इस बार भी वहां ईद-उल-अजहा 27 मई को मनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसी वजह से भारत में भी लोगों के बीच तारीख को लेकर भ्रम बना हुआ था।
हालांकि भारत में चांद देखने और स्थानीय इस्लामिक कैलेंडर के आधार पर त्योहार तय होते हैं। इसलिए भारत में 28 मई की तारीख को ही अंतिम और कन्फर्म माना जा रहा है। सोशल मीडिया और गूगल पर भी लोग लगातार “Bakrid 2026 Date in India” और “बकरीद कब है” जैसे सवाल सर्च कर रहे हैं।
क्या है ईद-उल-अजहा का इस्लामिक महत्व?
ईद-उल-अजहा को बलिदान का त्योहार कहा जाता है। यह पैगंबर इब्राहिम अलैहिस्सलाम की उस कुर्बानी की याद दिलाता है, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे की कुर्बानी देने का इरादा किया था। उनकी इस आज्ञाकारिता और समर्पण से खुश होकर अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक मेमना कुर्बानी के लिए भेज दिया।
इसी याद में आर्थिक रूप से सक्षम मुसलमान इस दिन बकरी, भेड़, गाय या ऊंट जैसे जानवरों की कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिसमें एक हिस्सा परिवार, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों तथा तीसरा जरूरतमंदों को दिया जाता है। यही इस त्योहार का सबसे बड़ा संदेश भी है कि खुशी और नेमतों को दूसरों के साथ बांटा जाए।
त्योहार सिर्फ रस्मों का नाम नहीं होते…
कई बार वो इंसान को त्याग, बराबरी
और दूसरों का दर्द समझना भी सिखाते हैं।
