दुनियाभर में लगातार बढ़ती गर्मी अब सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि जानलेवा खतरा बनती जा रही है। हाल ही में WHO की पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने चेतावनी दी है कि लगातार बढ़ रही हीटवेव इंसानी शरीर की सहनशक्ति की सीमा को पार कर सकती है। उनका कहना है कि आने वाले समय में अत्यधिक तापमान सीधे मौत का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ती गर्मी और हवा में नमी का खतरनाक मेल इंसानी शरीर पर गंभीर असर डाल रहा है। ऐसे हालात में शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता और हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।

हीटवेव अब सिर्फ मौसम नहीं, हेल्थ इमरजेंसी बनती जा रही

देशभर में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी अब लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई राज्यों में तापमान ऐसे स्तर तक पहुंच रहा है, जहां इंसानी शरीर के लिए लंबे समय तक सामान्य रहना मुश्किल हो सकता है। पूर्व WHO चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते तैयारी नहीं की गई तो हीटवेव आने वाले वर्षों में बड़ी हेल्थ इमरजेंसी साबित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती गर्मी सिर्फ असहजता नहीं पैदा करती, बल्कि शरीर के जरूरी अंगों पर सीधा असर डालती है। खासतौर पर बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।

भारत के कई हिस्से हीटवेव की चपेट में

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कई दिनों तक पड़ने वाली भीषण गर्मी शरीर पर गंभीर असर डालती है। डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, चक्करर आना और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है।

नमी वाली गर्मी क्यों बन रही ज्यादा खतरनाक?

डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के अनुसार, सूखी गर्मी की तुलना में ह्यूमिड हीट यानी नमी वाली गर्मी ज्यादा खतरनाक होती है। जब हवा में नमी ज्यादा होती है तो शरीर का पसीना जल्दी सूख नहीं पाता, जिससे बॉडी खुद को ठंडा नहीं कर पाती।

एक हालिया स्टडी में बताया गया कि ज्यादा नमी के साथ गर्मी बढ़ने पर शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है और हीट स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने इसे “साइलेंट किलर” तक बताया है।

मौतों का सही आंकड़ा शायद सामने नहीं आ रहा

डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने यह भी कहा कि भारत में हीटवेव से होने वाली मौतों का सही आंकड़ा शायद रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा है। उनके मुताबिक, कई मामलों में मौत की असली वजह गर्मी होने के बावजूद उसे दूसरे कारणों से जोड़ दिया जाता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले वर्षों में भारत में हजारों लोग हीट स्ट्रोक और अत्यधिक गर्मी की वजह से प्रभावित हुए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि असली आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड से कहीं ज्यादा हो सकता है।

सिर्फ अस्पताल नहीं, पूरे सिस्टम को तैयार करना जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि हीटवेव से निपटने के लिए सिर्फ अस्पतालों की तैयारी काफी नहीं होगी। इसके लिए सरकार, मौसम विभाग, नगर प्रशासन और स्वास्थ्य एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।

डॉ. स्वामीनाथन ने सुझाव दिया है कि भारत में एक “हीट कमीशन” बनाया जाए, जो अलग-अलग राज्यों के हिसाब से सुरक्षा योजना तैयार करे और लोगों को समय रहते चेतावनी दे सके।

हीटवेव के दौरान दिख सकते हैं ये खतरनाक लक्षण

  • तेज सिरदर्द
  • बार बार चक्कर आना
  • शरीर में कमजोरी
  • ज्यादा प्यास लगना
  • उल्टी और बेचैनी
  • तेज बुखार जैसा महसूस होना
  • बेहोशी या सांस लेने में दिक्कत

डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए क्योंकि लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

खुद को कैसे रखें सुरक्षित?

  • दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें।
  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • हल्के और सूती कपड़े पहनें।
  • बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें।
  • ज्यादा कैफीन और तला-भुना खाने से बचें।
  • शरीर में कमजोरी महसूस हो तो तुरंत आराम करें।

क्लाइमेट चेंज बना सबसे बड़ी वजह

वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ता ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज हीटवेव को और ज्यादा खतरनाक बना रहा है। हर साल रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के मामले सामने आ रहे हैं और आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी गर्मी इंसानी जीवन के लिए बड़ा संकट बन सकती है।