सोमालीलैंड में इज़रायल द्वारा राजनयिक प्रतिनिधि नियुक्त करने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है। कतर, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की सहित 16 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने शनिवार को दोहा में एक संयुक्त बयान जारी कर इस कदम की कड़ी निंदा की।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि इज़रायल का यह फैसला सोमालिया संघीय गणराज्य की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सीधा उल्लंघन है। देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के खिलाफ बताया और चेतावनी दी कि यह एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है।
इस विरोध में कतर, कुवैत, सऊदी अरब, मिस्र, सोमालिया, सूडान, लीबिया, बांग्लादेश, अल्जीरिया, फिलिस्तीन, तुर्की, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मॉरिटानिया, जॉर्डन और ओमान शामिल रहे।
क्षेत्रीय स्थिरता पर चिंता
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि इज़रायल का यह कदम अफ्रीकी संघ के संविधान अधिनियम का उल्लंघन करता है। देशों ने चेतावनी दी कि इससे हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है और क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सोमालीलैंड को लेकर इज़रायल के इस कदम ने राजनयिक गलियारों में कड़वाहट पैदा कर दी है। कतर के विदेश मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, सोमालीलैंड को 'तथाकथित' क्षेत्र बताते हुए इज़रायली दूत की नियुक्ति को अवैध माना गया है। मुस्लिम देशों का तर्क है कि यह एकतरफा कार्रवाई सोमालिया के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है और वैश्विक मंच पर इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हॉर्न ऑफ अफ्रीका में शांति की अपील
विदेश मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे सोमालिया की संप्रभुता का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि इज़रायल की इस पहल से क्षेत्र में चल रही शांति की कोशिशों को धक्का लग सकता है। इन 16 देशों ने एकजुट होकर कहा कि वे सोमालिया की अखंडता को बचाने के लिए हर मुमकिन कूटनीतिक कोशिश जारी रखेंगे और ऐसे किसी भी दूत को मान्यता नहीं दी जाएगी।

