महिला आरक्षण बिल पर जारी बहस के बीच संसद में एक नया मुद्दा केंद्र में आ गया—लोकसभा सीटों का परिसीमन। विपक्ष जहां इसे राजनीतिक रणनीति बता रहा है, वहीं सरकार इसे प्रतिनिधित्व बढ़ाने का कदम बता रही है। इसी बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में 850 सीटों का पूरा गणित समझाकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की।

सदन में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि परिसीमन को लेकर खासतौर पर दक्षिण भारत में भ्रम फैलाया जा रहा है कि इससे उनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी। उन्होंने आंकड़ों के जरिए समझाया कि प्रस्तावित बदलाव के बाद न सिर्फ उत्तर, बल्कि दक्षिण भारत के राज्यों को भी फायदा होगा।


किसे कितना फायदा?

अमित शाह के मुताबिक संभावित परिसीमन के बाद:

  • तमिलनाडु को लगभग 20 अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं
  • केरल को 10 सीटों का फायदा
  • तेलंगाना को 9 सीटें बढ़ने की संभावना
  • आंध्र प्रदेश को 13 सीटों का लाभ
  • महाराष्ट्र को करीब 24 अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रक्रिया किसी राज्य को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए है।


‘भ्रम नहीं फैलाना चाहिए’

अमित शाह ने यह भी साफ किया कि केंद्र सरकार जाति जनगणना को लेकर निर्णय ले चुकी है और वर्तमान जनगणना उसी आधार पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि परिसीमन आयोग का कानून पहले जैसा ही है, इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसका असर फिलहाल चल रही चुनाव प्रक्रिया पर नहीं पड़ेगा।


विपक्ष के आरोप क्या हैं?

विपक्ष का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है, खासकर 2029 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए। कई विपक्षी दलों ने यह भी कहा है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से अलग किया जाना चाहिए।


बिल पास करना आसान नहीं

संविधान संशोधन से जुड़े इस बिल को पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है।

  • लोकसभा में 360 सांसदों का समर्थन चाहिए, जबकि एनडीए के पास 293 सदस्य हैं
  • राज्यसभा में 163 का आंकड़ा जरूरी है, जबकि एनडीए करीब 142 पर है

ऐसे में विपक्ष अगर एकजुट रहता है, तो सरकार के लिए इस बिल को पारित कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


सियासत और गणित का मेल

महिला आरक्षण और परिसीमन का यह मुद्दा अब सिर्फ सामाजिक सुधार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सियासी रणनीति और संख्याओं के जटिल गणित में बदल गया है।

अमित शाह के ‘850 सीटों के गणित’ ने जहां सरकार का पक्ष मजबूत करने की कोशिश की है, वहीं विपक्ष अब भी इस मुद्दे पर सवाल उठाने से पीछे नहीं हट रहा। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने के संकेत हैं।