पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद राजनीतिक हिंसा, सड़क पर टकराव और आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। विधानसभा चुनावों के बाद से राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच संघर्ष अब सिर्फ राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कई जगहों पर यह सड़क पर दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ दिनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से विरोध प्रदर्शन, झड़पों और नेताओं के खिलाफ गुस्से की खबरें सामने आई हैं, जिसने बंगाल की राजनीति को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के दौरे के दौरान हुए विरोध और हंगामे ने सुर्खियां बटोरी थीं। उनके काफिले पर अंडे और पत्थर फेंके गए थे तथा "चोर-चोर" के नारे लगाए गए थे। उस घटना को लेकर सियासी घमासान अभी थमा भी नहीं था कि अब पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी भी विवादों के केंद्र में आ गए हैं। हुगली जिले में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें भारी नारेबाजी और विरोध का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कल्याण बनर्जी कभी सड़क पर बैठे तो कभी सिर पकड़कर लेटे हुए दिखाई दिए, जबकि उनके आसपास मौजूद लोग लगातार नारेबाजी कर रहे थे।इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण अब और गहरा होता जा रहा है? क्या यह केवल विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के समर्थकों के बीच टकराव है, या फिर जनता के एक वर्ग में बढ़ रही नाराजगी का संकेत भी है? इन सवालों के बीच कल्याण बनर्जी से जुड़ी यह घटना अब राज्य की राजनीति में नई बहस का विषय बन गई है।
क्या हुआ था?
हुगली जिले के चंदीतला थाना क्षेत्र में कल्याण बनर्जी पोस्ट-पोल हिंसा और TMC कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ ज्ञापन देने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां भारी हंगामा हुआ और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा समर्थित लोगों ने सांसद को घेर लिया और उनके साथ धक्का-मुक्की की। घटना के दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि कल्याण बनर्जी सड़क पर बैठ गए और बाद में सिर पकड़कर लेटे हुए भी दिखाई दिए।
चोर-चोर’ के नारे और बढ़ा विवाद
घटना के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा चोर-चोर के नारे लगाए जाने की भी चर्चा है। हाल के दिनों में बंगाल में कई TMC नेताओं के खिलाफ ऐसे नारे सुनाई दिए हैं। इससे पहले अभिषेक बनर्जी के सोनारपुर दौरे के दौरान भी प्रदर्शनकारियों ने “चोर-चोर” के नारे लगाए थे और उनके काफिले पर अंडे तथा पत्थर फेंके गए थे।
TMC का आरोप, भाजपा का पलटवार
तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरी घटना को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए भाजपा पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर TMC नेताओं को निशाना बना रहा है। वहीं भाजपा का दावा है कि यह जनता की नाराज़गी है और लोग राज्य में कथित भ्रष्टाचार तथा हिंसा के खिलाफ अपना विरोध जता रहे हैं।
क्यों बढ़ी राजनीतिक चिंता?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभिषेक बनर्जी के बाद अब कल्याण बनर्जी के विरोध का सामना करने से यह संकेत मिल रहा है कि बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण और टकराव लगातार बढ़ रहा है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद भी राज्य का माहौल शांत नहीं हुआ है और सत्तारूढ़ TMC तथा भाजपा के बीच संघर्ष नई घटनाओं के साथ और तेज होता दिखाई दे रहा है।
