नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में अदालत ने दोषी को कड़ी सजा सुनाते हुए 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि इस प्रकार के जघन्य अपराध न केवल पीड़िता के जीवन पर गहरा आघात पहुंचाते हैं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा और नैतिक व्यवस्था को भी प्रभावित करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में सख्त सजा देना आवश्यक है ताकि अपराधियों में भय पैदा हो और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। अदालत ने यह भी माना कि पीड़िता को न्याय के साथ-साथ मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सहारा मिलना जरूरी है, इसी को ध्यान में रखते हुए उसे 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। यह मुआवजा राशि उसके पुनर्वास, शिक्षा और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने में सहायक होगी। साथ ही अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीड़िता को आवश्यक कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह इस कठिन समय से उबरकर सामान्य जीवन की ओर लौट सके।