भारत इस समय एक ऐसे स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है, जहां एक तरफ मोटापा और डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, तो दूसरी ओर कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2023-24 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश में पोषण से जुड़ी दो विपरीत समस्याएं एक साथ मौजूद हैं। कई राज्यों में लोग अधिक वजन और मोटापे से जूझ रहे हैं, जबकि उसी आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब भी कुपोषण का शिकार है।

मोटापे के मामलों में बढ़ोतरी

सर्वे के अनुसार, 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 30.7 प्रतिशत महिलाएं और 27.3 प्रतिशत पुरुष अब अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आते हैं। NFHS-5 की तुलना में यह वृद्धि काफी तेज रही है। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर दिखाई दे रही है, जहां लगभग 43 प्रतिशत महिलाएं और 36.3 प्रतिशत पुरुष मोटापे या अधिक वजन से प्रभावित हैं।

कुपोषण की समस्या भी बनी हुई

दूसरी ओर, कुपोषण की समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ती दिखाई दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लगभग हर पांचवां वयस्क अब भी कम वजन की श्रेणी में आता है। पुरुषों में कम वजन की दर 16.2 प्रतिशत से बढ़कर 19.7 प्रतिशत हो गई है, जबकि महिलाओं में यह 18.7 प्रतिशत से बढ़कर 19.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह स्थिति बताती है कि पोषण संबंधी असमानताएं अब भी बरकरार हैं।

डायबिटीज के बढ़ते मामले

NFHS-6 ने डायबिटीज को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। 15 वर्ष से अधिक उम्र की 17.8 प्रतिशत महिलाओं में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक पाया गया या वे डायबिटीज की दवा ले रही थीं। पुरुषों में यह आंकड़ा 20.9 प्रतिशत दर्ज किया गया। यानी हर पांचवां पुरुष डायबिटीज या उससे जुड़ी दवाओं पर निर्भर है। यह संख्या पिछले सर्वेक्षण की तुलना में काफी बढ़ी है।

किन राज्यों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक?

रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में मोटापे के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं बिहार, झारखंड, राजस्थान, असम, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कुपोषण की समस्या बढ़ती दिखाई दी है।

उत्तर प्रदेश में मोटापा, कुपोषण और डायबिटीज तीनों के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे राज्य की स्थिति और अधिक चिंताजनक मानी जा रही है।

उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रही डायबिटीज

सर्वे के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में डायबिटीज की रफ्तार राष्ट्रीय औसत से अधिक तेजी से बढ़ रही है। हालात ऐसे हैं कि अब प्रदेश का लगभग हर पांचवां पुरुष और हर छठी महिला डायबिटीज से प्रभावित है।

पूरे देश में महिलाओं के बीच मधुमेह बढ़ने की दर 4.3 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 5.5 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। पुरुषों में राष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि दर 5.3 प्रतिशत है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह करीब 8 प्रतिशत दर्ज की गई है।

हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में मामूली राहत

बीपी के मामलों में कुछ राहत जरूर देखने को मिली है। महिलाओं और पुरुषों दोनों में हाई ब्लड प्रेशर की दर में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि इसके बावजूद देश का लगभग हर पांचवां वयस्क अब भी हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर अब भी हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों का एक बड़ा जोखिम कारक बना हुआ है।

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।