महंगे पेट्रोल और बढ़ते ईंधन खर्च के बीच अब फ्लेक्स-फ्यूल (Flex Fuel) तकनीक तेजी से चर्चा में है। भारत सरकार भी इथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा दे रही है ताकि पेट्रोल और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर फ्लेक्स-फ्यूल क्या है, यह कैसे काम करता है और इससे वाहन मालिकों को क्या फायदा मिलेगा।

क्या है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक?

फ्लेक्स-फ्यूल ऐसी तकनीक है, जिसमें वाहन का इंजन एक से अधिक प्रकार के ईंधन या उनके मिश्रण पर चल सकता है। आमतौर पर इसमें पेट्रोल और इथेनॉल का मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है। पारंपरिक गाड़ियां केवल पेट्रोल या डीजल पर चलती हैं, जबकि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ईंधन में इथेनॉल की मात्रा के अनुसार खुद को एडजस्ट कर लेते हैं।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वाहन में इस्तेमाल होने वाला इंजन पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रणों को पहचानकर उसी के मुताबिक अपनी कार्यप्रणाली बदल लेता है। इससे इंजन की परफॉर्मेंस पर ज्यादा असर नहीं पड़ता और वाहन सुचारू रूप से चलता रहता है।

कैसे काम करता है फ्लेक्स-फ्यूल इंजन?

फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में एक विशेष फ्यूल सेंसर और एडवांस्ड इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) लगी होती है। यह सेंसर फ्यूल टैंक में मौजूद पेट्रोल और इथेनॉल के अनुपात का पता लगाता है। इसके बाद ECU इंजन की टाइमिंग, फ्यूल इंजेक्शन और अन्य सेटिंग्स को ऑटोमैटिक तरीके से एडजस्ट कर देता है।

चूंकि इथेनॉल सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक संक्षारक (Corrosive) होता है, इसलिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के फ्यूल पाइप, फ्यूल पंप और अन्य महत्वपूर्ण पार्ट्स को विशेष सामग्री और कोटिंग से तैयार किया जाता है ताकि उन पर किसी तरह का नुकसान न हो।

इथेनॉल क्या है और E20, E85, E100 का मतलब क्या होता है?

इथेनॉल एक तरह का जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे गन्ने, मक्का, शीरे और टूटे हुए चावल जैसी कृषि फसलों से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल के मुकाबले पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है क्योंकि इसके इस्तेमाल से प्रदूषण कम हो सकता है। यही वजह है कि सरकार इथेनॉल वाले ईंधन को बढ़ावा दे रही है। वहीं E20, E85 और E100 ईंधन में मौजूद इथेनॉल की मात्रा को बताते हैं। E20 में 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल होता है, E85 में 85 फीसदी इथेनॉल और 15 फीसदी पेट्रोल होता है, जबकि E100 पूरी तरह इथेनॉल से बना ईंधन होता है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन इन सभी तरह के ईंधनों पर चल सकते हैं और जरूरत के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर लेते हैं।

भारत में क्यों बढ़ रहा है फ्लेक्स-फ्यूल का महत्व?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने पर देश में भी ईंधन महंगा हो जाता है।

इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है। इससे न केवल पेट्रोल की खपत कम होगी, बल्कि किसानों को भी अपनी फसलों के बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से इथेनॉल बनने के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

क्या होंगे इसके फायदे?

फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के कई संभावित फायदे बताए जा रहे हैं। इससे पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम होगी, ईंधन की लागत घट सकती है और प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है। इसके अलावा इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं और पेट्रोल के बढ़ते खर्च से राहत दिलाने का एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकते हैं।