पिछले कुछ महीनों से महंगाई पहले ही आम आदमी की कमर तोड़ चुकी है, लेकिन अब लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम लोगों की जेब में और बड़ी सेंध लगा रहे हैं। देशभर में हर परिवार इस बात से परेशान है कि रोज़मर्रा की लागत कैसे बढ़ती जा रही है चाहे वह स्कूल-कॉलिज की यात्रा हो, सब्ज़ियों की डिलीवरी, शहरों के अंदर लोकेल ट्रांसपोर्ट, या खेतों में डीज़ल से चलने वाली मशीनें।इन सबके बीच, पिछले 10 दिनों में चौथी बार ईंधन के दाम बढ़ाने के फैसले ने राजनीतिक माहौल को तपा दिया। विपक्षी दलों ने इसे आम जनता पर सीधा हमला बताया है।कांग्रेस,AAP और अन्य क्षेत्रीय दलों ने केंद्र सरकार को महंगाई और टैक्स नीति को लेकर कठघरे में खड़ा कर दिया है।

कीमतें कैसे बढ़ीं?

नवीनतम संशोधित दरों के मुताबिक, पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हो गया है। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल 100 रुपये के पार और डीज़ल भी 95 रुपये के करीब पहुँच गया है।यह बढ़ोतरी सिर्फ एक दिन की नहीं है पिछले 10 दिनों में यह चौथी बार ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई हैं। लगातार जारी इस वृद्धि ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है और महंगाई को लेकर चिंता और गहरी कर दी है।

कांग्रेस, AAP का बड़ा हमला

कांग्रेस ने कीमतों में इस लगातार बढ़ोतरी को Silent Tax करार दिया कांग्रेस के मुताबिक यह सरकार का चुपचाप टैक्स लगाने का तरीका है, जहाँ जनता की जेब से पैसे लिए जा रहे हैं लेकिन कोई जवाबदेही नहीं दिखाई जाती।कांग्रेस नेताओं के मुख्य आरोप चुनाव खत्म होते ही सरकार ने राहत देने की बजाय महंगाई बढ़ा दी।केंद्र सरकार ईंधन कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए टैक्स कम नहीं कर रही।यह आम लोगों की बचत और मिडिल क्लास की जेब पर सीधा हमला है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता है, लेकिन उसका लाभ जनता तक नहीं पहुँचाया जा रहा।कांग्रेस का कहना है कि सरकार को तुरंत एक्साइज ड्यूटी कम करनी चाहिए, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नियंत्रण आए और जनता को थोड़ी राहत मिले।उधर आम आदमी पार्टी ने भी केंद्र को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि दिल्ली ही नहीं, पूरे देश में लोग टूटा महसूस कर रहे हैं अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम घटने पर भी सरकार फायदा जनता तक नहीं पहुँचाती। AAP नेताओं का आरोप है कि लगातार कीमतें बढ़ाकर केंद्र सरकार घर-घर के बजट पर तीखा प्रहार कर रही है और आम परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है।

अन्य विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया

अन्य क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सीधा निशाना साधा है। उनका कहना है कि यह कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई का सीधा प्रहार है, जिसका असर देश के हर सेक्टर ट्रांसपोर्ट, कृषि, छोटे व्यापार और घरेलू बजट पर पड़ेगा। कई दलों ने इसे जनता के खिलाफ फैसला बताते हुए दावा किया कि ईंधन के दाम बढ़ाना आर्थिक दबाव को और बढ़ाएगा और सरकार को तुरंत राहत देने वाले कदम उठाने चाहिए।

सरकार का पक्ष क्या है?

कीमतों में लगातार बढ़ोतरी पर सरकार ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि यह एक प्राकृतिक समायोजन है, जिसे रोका नहीं जा सकता। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, इसलिए घरेलू दामों पर असर पड़ना स्वाभाविक है।भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें वैश्विक बाजार पर निर्भर करती हैं, इसलिए कंपनियाँ उसी के अनुसार रेट तय करती हैं।सरकार का यह भी तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति स्थिर होते ही राहत मिलने की संभावना रहती है, पर फिलहाल यह बढ़ोतरी बाजार की मजबूरी है।