कर्नाटक की राजनीति आज असाधारण उथल-पुथल से गुजर रही है। सत्ता के केंद्र सिद्धारमैया के इस्तीफे की खबर ने पूरे राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। बीते कई दिनों से नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएँ, हाईकमान की बैठकों, विधायकों की लॉबी और सत्ता संतुलन के समीकरणों के बीच अब यह साफ हो चुका है कि कर्नाटक की सरकार में सबसे बड़ा चेहरा बदलने वाला है।स्थिति और दिलचस्प तब हो गई जब सिद्धारमैया ने अपने मंत्रियों के साथ नाश्ते की बैठक में इस्तीफा देने का संकेत दिया लेकिन उसी वक़्त पता चला कि राज्यपाल फिलहाल राज्य में मौजूद ही नहीं हैं। इसने पूरे घटनाक्रम को संवैधानिक, राजनीतिक और प्रशासनिक तीनों स्तरों पर और जटिल बना दिया है।लोक भवन के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मुख्यमंत्री और राज्यपाल की मुलाकात तय नहीं हो सकी है और ऐसी स्थिति में सीएम अपने इस्तीफे को राज्यपाल के सचिव को सौंप सकते हैं या प्रतीक्षा कर सकते हैं। यानी कर्नाटक इस समय एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ सत्ता परिवर्तन तो तय माना जा रहा है, पर प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी यह बड़ी राजनीतिक पहेली बन चुकी है।कांग्रेस हाईकमान की रणनीति, विधायकों की बैठकों, और संभावित नए नेतृत्व के नामों ने राजधानी बेंगलुरु का राजनीतिक तापमान तेज़ कर दिया है। पार्टी के अंदर यह चर्चा ज़ोरों पर है कि सत्ता की कमान अब किसे सौंपी जाएगी और यह बदलाव आगामी चुनावों की दिशा कैसे तय करेगा।

इस्तीफे का निर्णय और अध्यक्षता

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आज सुबह अपने आधिकारिक आवास पर एक खास बैठक आयोजित की जिसमें उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों को बताया कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले हैं। इस बैठक में उनके डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कई मंत्री शामिल थे। कई रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अपने करीबी MLAs से कहा कि वह आज दोपहर 3 बजे इस्तीफा देंगे और इस आशय की तैयारी है कि आने वाले समय में डीके शिवकुमार उनके उत्तराधिकारी के रूप में मुख्यमंत्री पद संभाल सकते हैं।

राज्यपाल की गैरमौजूदगी और इस्तीफा प्रक्रिया

स्थिति यह है कि राज्यपाल फिलहाल बेंगलुरु में मौजूद नहीं हैं, इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि इस्तीफा कब और कैसे सौंपा जाएगा। लोक भवन के अधिकारियों के मुताबिक अभी तक कोई समय तय नहीं हुआ है कि मुख्यमंत्री कब राज्यपाल से मिलेंगे या इस्तीफा सौंपेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्यमंत्री तब भी इस्तीफा दे सकते हैं जब राज्यपाल उपस्थित न हों, बशर्ते गवर्नर के प्रतिनिधि या सचिव इस प्रक्रिया को पूरा कर सकें; इसका निर्णय संवैधानिक नियमों के तहत होता है।

कांग्रेस हाईकमान और नेतृत्व परिवर्तन

केंद्रीय नेतृत्व और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के निर्देश के बाद यह बदलाव बताया जा रहा है, ताकि नेतृत्व में नया बदलाव किया जा सके और पार्टी की पॉलिटिकल रणनीति को आगे बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही सत्तापक्ष की अंदरूनी चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया को केंद्र में कोई अन्य राजनीतिक जिम्मेदारी दी जा सकती है या उन्हें राज्यसभा का प्रस्ताव भी मिला है ।जिससे पार्टी के उच्च नेतृत्व का संतुलन भी बना रहे।

राजनीतिक माहौल और प्रतिक्रियाएँ

बैठक के दौरान डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर उनका सम्मान किया, जिससे कांग्रेस के भीतर सौहार्दपूर्ण संकेत मिले। कांग्रेस के विधायक इस बदलाव को समय पर उठाया गया कदम बता रहे हैं, जबकि दूसरी टीमें इसे राज्य के राजनीतिक समीकरण का नया अध्याय कह रही हैं। विपक्षी और अन्य राजनीतिक दलों द्वारा भी इस निर्णय पर प्रतिक्रियाएँ मिल रही हैं, जिसमें पार्टी की रणनीति और भविष्य के चुनावों पर प्रभावों पर चर्चा जारी है।