विटामिन बी12 को लंबे समय से शरीर और दिमाग के लिए बेहद जरूरी न्यूट्रिएंट माना जाता रहा है। डॉक्टर आमतौर पर ब्लड टेस्ट के जरिए इसकी जांच करते हैं और अगर रिपोर्ट तय सीमा के भीतर हो, तो व्यक्ति को पूरी तरह स्वस्थ मान लिया जाता है। लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई बुजुर्गों में बी12 लेवल सामान्य होने के बावजूद दिमाग और नसों से जुड़ी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
बी12 नॉर्मल होने के बाद भी क्यों हो सकती है परेशानी?
यह रिसर्च कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की है, जिसके नतीजे एक मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। स्टडी में पाया गया कि कुछ बुजुर्गों में सामान्य बी12 लेवल होने के बावजूद ब्रेन फंक्शन और नर्वस सिस्टम पर असर दिखाई देने लगा था
विटामिन बी12 शरीर में रेड ब्लड सेल्स बनाने, नसों को स्वस्थ रखने और डीएनए तैयार करने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से एनीमिया, कमजोरी, हाथ-पैर सुन्न होना, याददाश्त कमजोर होना और बैलेंस बिगड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अब तक डॉक्टर मुख्य रूप से गंभीर कमी वाले मामलों पर ध्यान देते रहे हैं, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि दिक्कतें इससे काफी पहले शुरू हो सकती हैं।
रिसर्च में सामने आया बड़ा खुलासा
रिसर्च टीम ने करीब 71 साल औसत उम्र वाले 231 स्वस्थ बुजुर्गों पर अध्ययन किया। इनमें किसी को डिमेंशिया या हल्की मानसिक कमजोरी की समस्या नहीं थी। वैज्ञानिकों ने सिर्फ कुल बी12 लेवल ही नहीं, बल्कि एक्टिव बी12 की भी जांच की। यही वह रूप है, जिसे शरीर वास्तव में इस्तेमाल कर पाता है।
दिलचस्प बात यह रही कि ज्यादातर लोगों का बी12 लेवल मेडिकल मानकों के हिसाब से सामान्य था। इसके बावजूद जिन लोगों में एक्टिव बी12 कम था, उनमें सोचने की गति और विजुअल प्रोसेसिंग धीमी पाई गई। रिसर्च में यह भी सामने आया कि उनके दिमाग की नसें संकेतों पर धीमी प्रतिक्रिया दे रही थीं।
ब्रेन स्कैन में दिखे गंभीर संकेत
ब्रेन स्कैन के दौरान वैज्ञानिकों ने एक और अहम बात नोट की। जिन लोगों में एक्टिव बी12 कम था, उनके दिमाग में व्हाइट मैटर लीजन ज्यादा पाए गए। व्हाइट मैटर दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच संदेश पहुंचाने का काम करता है।
इन हिस्सों को नुकसान पहुंचने का संबंध स्ट्रोक, डिमेंशिया और मानसिक गिरावट जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है। न्यूरोलॉजी एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह स्टडी दिखाती है कि मौजूदा मेडिकल मानक बी12 से जुड़ी शुरुआती ब्रेन और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं को पूरी तरह पकड़ नहीं पा रहे हैं। उनके मुताबिक, कई लोगों में साफ लक्षण दिखने से पहले ही नसों और दिमाग पर असर शुरू हो सकता है।
उम्र बढ़ने के साथ क्यों बढ़ता है खतरा?
वैज्ञानिकों का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में बी12 को एब्जॉर्ब करने की क्षमता कम होने लगती है। कुछ दवाइयां, पाचन से जुड़ी समस्याएं और पूरी तरह शाकाहारी डाइट भी बी12 की कमी का खतरा बढ़ा सकती हैं। हालांकि रिसर्चर्स ने साफ किया है कि यह स्टडी सीधे तौर पर यह साबित नहीं करती कि कम एक्टिव बी12 ही मानसिक गिरावट की वजह है, लेकिन यह जरूर दिखाती है कि सामान्य रिपोर्ट आने के बावजूद दिमाग में बदलाव शुरू हो सकते हैं।
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई गतिविधि या उपचार को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
