उफ़क साहिल
बिहार में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध राज्य सरकार के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने साइबर अपराध की जांच प्रणाली में बड़ा सुधार करने की तैयारी शुरू कर दी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में जहां राज्य में 1,606 साइबर अपराध के मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 4,450 तक पहुंच गया। वर्ष 2024 में साइबर अपराध के मामलों ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए करीब 5,712 केस दर्ज किए गए। चालू वर्ष 2025 में भी मई महीने तक हजारों मामले सामने आ चुके हैं।
लगातार बढ़ते मामलों के चलते अब तक जांच की जिम्मेदारी संभाल रहे इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों पर काम का दबाव काफी बढ़ गया है। इसी समस्या के समाधान के लिए गृह विभाग ने एक नई व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत अब दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) स्तर के अधिकारियों को भी साइबर अपराध मामलों की जांच का अधिकार देने की योजना है।
सरकार का कहना है कि इस कदम से जांच प्रक्रिया को गति मिलेगी, लंबित मामलों में कमी आएगी और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सकेगा। इस संबंध में गृह विभाग ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है और मंजूरी मिलते ही राज्य में यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
इसके साथ ही दारोगा रैंक के अधिकारियों को साइबर अपराध से निपटने के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण देने की भी तैयारी है, ताकि वे डिजिटल सबूतों, ऑनलाइन ठगी और अन्य तकनीकी अपराधों की प्रभावी जांच कर सकें।
जानकारों का मानना है कि यह फैसला बिहार में बढ़ते डिजिटल अपराधों पर लगाम लगाने और पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम पहल साबित हो सकता है।
