दय्यान खान

पुणे के शिरूर इलाके से सामने आई एक घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है, जहां आम लोगों ने मिलकर एक गर्भवती महिला की मदद की और सड़क पर ही सुरक्षित डिलीवरी करवाई।

23 साल की सुप्रिया काले अचानक तेज लेबर पेन के कारण सड़क पर ही गिर पड़ीं। जानकारी के मुताबिक, उन्हें पहले एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन वहां से उन्हें बड़े अस्पताल जाने की सलाह देकर भेज दिया गया। इसी दौरान रास्ते में उनकी हालत बिगड़ गई और वे दर्द से तड़पने लगीं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मदद के लिए कदम बढ़ाया। पास के एक क्लिनिक से डॉक्टर सुनीता पोटे को बुलाया गया, जो बिना देरी किए अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गईं।

सबसे बड़ी चुनौती थी भीड़भाड़ के बीच महिला की प्राइवेसी बनाए रखना। ऐसे में वहां मौजूद महिलाओं ने अद्भुत संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने अपनी साड़ियां, दुपट्टे और चादरों से चारों ओर घेरा बनाकर एक अस्थायी ‘डिलीवरी रूम’ तैयार कर दिया। इस प्रयास ने डॉक्टर को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में डिलीवरी कराने में मदद की।

डॉक्टर सुनीता पोटे की समझदारी और लोगों के सहयोग से सुप्रिया ने सड़क पर ही एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। कुछ ही पलों में वहां खुशी की किलकारी गूंज उठी। यह नजारा वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए भावुक कर देने वाला था।

आज के समय में, जब अक्सर लोग ऐसी घटनाओं में सिर्फ वीडियो बनाने में लगे रहते हैं, वहां इन अनजान लोगों ने आगे बढ़कर मदद की और दो जिंदगियां बचाईं। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और हर कोई इन मददगारों और डॉक्टर की सराहना कर रहा है।