सबा फिरदौस
यमन के बंदरगाह शहर मुकल्ला पर मंगलवार सुबह सऊदी अरब के हवाई हमले के बाद खाड़ी देशों के बीच तनाव तेज हो गया है। सऊदी अरब का दावा है कि बंदरगाह पर पहुंचे दो जहाजों में 80 से अधिक वाहन, हथियार और गोला-बारूद थे, जिन्हें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की ओर से अलगाववादी सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के लिए भेजा गया था।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने कहा कि यह सैन्य कार्रवाई तय नियमों के तहत की गई। सऊदी अरब ने आरोप लगाया कि यूएई ने बिना सूचना दिए अपने सैनिकों और सामग्री को अल-रयान सैन्य अड्डे पर स्थानांतरित किया और इसे “बेहद खतरनाक” कदम बताया।
यूएई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए संयम बरतने की अपील की, लेकिन बाद में यमन से अपनी बाकी सेना वापस बुलाने का ऐलान कर दिया। यह फैसला यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार की 24 घंटे में सेना हटाने की मांग के बाद आया, जिसे सऊदी अरब का समर्थन मिला।
इस घटनाक्रम से यमन की दस साल पुरानी जंग में नया मोड़ आने और सऊदी अरब व यूएई के रिश्तों में गहरा तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे
