गर्मी और उमस के मौसम में पसीना आना शरीर की सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब यही पसीना तेज बदबू का कारण बनने लगे तो यह परेशानी और शर्मिंदगी दोनों का सबब बन सकता है। खासकर अंडरआर्म्स यानी बगल के हिस्से में पसीना अधिक आता है, जिससे वहां बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। यही बैक्टीरिया पसीने में मौजूद प्रोटीन और फैटी एसिड को तोड़कर ऐसी गंध पैदा करते हैं, जो आसपास के लोगों को भी महसूस होने लगती है।

क्यों आती है अंडरआर्म्स से ज्यादा बदबू?

विशेषज्ञों के अनुसार पसीना खुद में बदबूदार नहीं होता। असली समस्या तब शुरू होती है जब त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया पसीने के संपर्क में आते हैं। अंडरआर्म्स में मौजूद एपोक्राइन ग्रंथियां ऐसे तत्व छोड़ती हैं, जिन्हें बैक्टीरिया आसानी से तोड़ देते हैं। इसके बाद दुर्गंध पैदा होती है। ज्यादा गर्मी, टाइट कपड़े, साफ-सफाई की कमी, हार्मोनल बदलाव और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी इस बदबू को बढ़ा सकती हैं।

फिटकरी कैसे करती है काम?

अलीगढ़ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के आयुर्वेदाचार्य डॉ. पीयूष माहेश्वरी के मुताबिक फिटकरी में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल वर्षों से त्वचा की देखभाल और व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए किया जाता रहा है। नहाने के बाद हल्के गीले अंडरआर्म्स पर फिटकरी रगड़ने से वहां मौजूद कुछ बैक्टीरिया कम हो सकते हैं, जिससे दुर्गंध लंबे समय तक नियंत्रित रहने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि कई लोग इसे प्राकृतिक डियोड्रेंट के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं।

फिटकरी लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

नहाने के बाद अंडरआर्म्स को अच्छी तरह साफ करें और हल्का गीला रहने पर फिटकरी का छोटा टुकड़ा धीरे-धीरे रगड़ें। कुछ मिनट तक इसे सूखने दें। हालांकि अगर त्वचा पर कट, जलन, रैशेज या किसी प्रकार की एलर्जी हो तो फिटकरी लगाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इससे चुभन या जलन हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिटकरी केवल एक सहायक उपाय है, इसका असर हर व्यक्ति में अलग अलग हो सकता है।

सिर्फ फिटकरी नहीं, ये आदतें भी हैं जरूरी

अंडरआर्म्स की बदबू से बचने के लिए रोजाना स्नान करना, सूती और साफ कपड़े पहनना, पसीने से भीगे कपड़ों को तुरंत बदलना और त्वचा को सूखा रखना बेहद जरूरी है। यदि लगातार सफाई और घरेलू उपायों के बावजूद बदबू बनी रहती है या अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो यह किसी संक्रमण, हार्मोनल गड़बड़ी या अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।