
बिहार में अपराध के खिलाफ कार्रवाई अब तेज और आक्रामक होती दिख रही है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने साल 2026 के शुरुआती महीनों में जिस तरह से ऑपरेशन चलाया है, उससे साफ संकेत मिल रहा है कि पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक राज्य में औसतन हर महीने 3 एनकाउंटर हो रही हैं, जो कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है।
चार महीनों में 12 मुठभेड़, कई बड़े अपराधी ढेर
जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच पुलिस और एसटीएफ ने कुल 12 मुठभेड़ की हैं। इन अभियानों में चार कुख्यात अपराधी मारे गए हैं, जबकि नौ बदमाशों को गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामलों में अपराधियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए फायरिंग की या भागने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह परिस्थितियों के अनुरूप की गई और हर ऑपरेशन में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।
इन मुठभेड़ों में जिन अपराधियों का अंत हुआ, उनमें कई बड़े और वांछित नाम शामिल हैं। वैशाली जिले में प्रिंस उर्फ अभिजीत, जिस पर 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे और उस पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित था, पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। इसके अलावा मोतिहारी में कुंदन ठाकुर और प्रियांश दुबे को भी पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर किया। सुल्तानगंज मामले का आरोपी रामधनी यादव भी इसी तरह की कार्रवाई में मारा गया। इन अभियानों के दौरान कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए और एक जवान के शहीद होने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे इन ऑपरेशनों की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
एनकाउंटर के साथ बड़ी गिरफ्तारियां, सख्त संदेश
पुलिस की कार्रवाई केवल मुठभेड़ों तक सीमित नहीं रही है। इसी अवधि में एसटीएफ ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी अभियान भी चलाया है। राज्यभर में कुल 730 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 38 इनामी अपराधी शामिल हैं। इसके साथ ही 18 नक्सलियों को भी पकड़ा गया है और 17 ऐसे अपराधियों को अन्य राज्यों से गिरफ्तार कर बिहार लाया गया है, जो लंबे समय से फरार चल रहे थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन लगातार कार्रवाइयों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। अपराधियों के बीच डर का माहौल बना है और कई जगहों पर आपराधिक गतिविधियों में कमी आई है। उनका स्पष्ट संदेश है कि अब अपराधियों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और कानून से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि, इस बढ़ती सख्ती के बीच बहस भी शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं, तो वहीं कुछ विशेषज्ञ और सामाजिक संगठन इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि लगातार बढ़ते एनकाउंटर मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कानून के दायरे से बाहर जाकर कार्रवाई तो नहीं की जा रही।
बहरहाल, बिहार में अपराध के खिलाफ चल रही इस मुहिम ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासन अब किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह सख्त रणनीति राज्य में अपराध पर स्थायी नियंत्रण स्थापित कर पाती है या नहीं।
