दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है। इस बार विवाद की वजह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ का वह बयान बना है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में कहा कि “हम भारतीय हैं और भारतीय इसलिए हैं क्योंकि हमारे डीएनए में महादेव का डीएनए है।” यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक, शैक्षणिक और छात्र संगठनों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। लेकिन विवाद सिर्फ बयान तक सीमित नहीं रहा। जामिया परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन भी हुआ, जिसने पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया।


आरएसएस के ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद

मंगलवार को जामिया कैंपस में आरएसएस की ओर से ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम की जानकारी सामने आते ही कई छात्र संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय परिसर को वैचारिक और राजनीतिक मंच में बदला जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन समेत कई छात्र समूहों ने कैंपस के भीतर और बाहर प्रदर्शन किया।


छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई के आरोप

प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए। छात्र संगठनों का आरोप है कि प्रदर्शन रोकने के लिए पुलिस ने सख्ती दिखाई। कुछ छात्र संगठनों ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान धक्का-मुक्की हुई और लाठीचार्ज जैसे हालात बने। हालांकि प्रशासन या पुलिस की ओर से आधिकारिक तौर पर लाठीचार्ज की स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई है। कैंपस के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती जरूर की गई थी ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। छात्र नेताओं का कहना है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण था और उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए था।


कुलपति ने मंच से क्या कहा?

कार्यक्रम में मौजूद जामिया के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ ने अपने संबोधन में भारत की विविधता और सांस्कृतिक एकता की बात की। उन्होंने कहा कि लोगों की भाषा, परंपराएं और जीवनशैली अलग हो सकती है, लेकिन भारतीय पहचान सबको जोड़ती है। इसी दौरान उन्होंने कहा कि “हम भारतीय हैं क्योंकि हमारे डीएनए में महादेव का डीएनए है।”


महादेव के परिवार का उदाहरण

अपने भाषण में उन्होंने भगवान शिव के परिवार का उदाहरण देते हुए सह-अस्तित्व की बात कही। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के गले में सांप है, गणेश जी का वाहन चूहा है, कार्तिकेय का वाहन मोर है और माता पार्वती का वाहन शेर है। प्राकृतिक रूप से ये जीव एक-दूसरे के विरोधी माने जाते हैं, लेकिन फिर भी एक परिवार में साथ रहते हैं। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति का संदेश बताया कि अलग-अलग धर्म, जाति और समुदाय के लोग एक साथ रह सकते हैं।


सोशल मीडिया पर दो धड़े

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया। एक पक्ष ने कहा कि कुलपति ने सांस्कृतिक एकता और सह-अस्तित्व का संदेश दिया है। दूसरे पक्ष ने सवाल उठाया कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति को धार्मिक प्रतीकों से जुड़े बयान देने चाहिए या नहीं।


जामिया की राजनीति फिर चर्चा में

जामिया लंबे समय से छात्र आंदोलनों और राजनीतिक बहसों का केंद्र रहा है। ऐसे में आरएसएस कार्यक्रम, छात्र विरोध, पुलिस कार्रवाई के आरोप और कुलपति के बयान—इन सबने मिलकर इस मुद्दे को और बड़ा बना दिया है! अब सवाल सिर्फ एक बयान का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों की वैचारिक स्वतंत्रता, छात्र अधिकारों और प्रशासनिक भूमिका का भी बन गया है।