देश के कई हिस्सों में इस समय गर्मी सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। दोपहर की सड़कों पर सन्नाटा है, लोग घरों में कैद हैं और कई शहरों में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है। उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तक लू के थपेड़ों ने हालात मुश्किल कर दिए हैं। मौसम विभाग लगातार हीटवेव अलर्ट जारी कर रहा है और कई जगहों पर स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सलाह दे रहा है। इसी भीषण गर्मी और झुलसा देने वाले मौसम के बीच अब एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने लोगों को राहत की उम्मीद दी है। भारतीय मौसम विभाग यानी आईएमडी के ताजा अपडेट के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की चाल उम्मीद से बेहतर दिखाई दे रही है और इसके आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है- क्या अब तपती धरती को राहत मिलने वाली है?

इस बार गर्मी ने क्यों तोड़े रिकॉर्ड?

इस साल मई और जून की शुरुआत में देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया। राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में भीषण गर्मी ने लोगों को परेशान किया। कई शहरों में दिन का तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में सूखी और गर्म हवाओं के लंबे समय तक बने रहने से हीटवेव की स्थिति गंभीर हुई। बारिश की कमी और लगातार साफ आसमान ने गर्मी का असर और बढ़ा दिया। यही वजह रही कि लोगों को ऐसा महसूस होने लगा जैसे सचमुच "आसमान से आग बरस रही हो"। हालांकि यह समझना भी जरूरी है कि “आसमान से आग बरसना” जैसी भाषा हेडलाइन का हिस्सा होती है। वैज्ञानिक रूप से इसका मतलब अत्यधिक तापमान और हीटवेव की स्थिति से है।

अब मानसून को लेकर क्या कह रहा है मौसम विभाग?

भारतीय मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अंडमान-निकोबार क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी के हिस्सों में आगे बढ़त दिखाई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री परिस्थितियां फिलहाल मानसून के लिए अनुकूल बनी हुई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, केरल में मानसून की एंट्री को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। अगर मौसम प्रणाली इसी तरह सक्रिय रहती है, तो मानसून सामान्य समय के आसपास या कुछ क्षेत्रों में थोड़ा पहले भी दस्तक दे सकता है। यही वजह है कि भीषण गर्मी के बीच राहत की उम्मीद बढ़ी है।

सिर्फ बारिश नहीं, देश की अर्थव्यवस्था भी जुड़ी है मानसून से

भारत में मानसून सिर्फ मौसम नहीं होता। इसका असर खेतों से लेकर बाजार तक दिखाई देता है। देश की बड़ी आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है और खेती काफी हद तक मानसूनी बारिश पर टिकी रहती है। अगर मानसून सामान्य रहता है, तो किसानों को राहत मिलती है, फसलों की स्थिति बेहतर रहती है और खाद्य महंगाई पर भी असर पड़ता है। लेकिन अगर बारिश कमजोर रहती है या देर से आती है, तो इसका असर सीधे खेती और अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है। इसीलिए मानसून का हर अपडेट सिर्फ मौसम की खबर नहीं माना जाता, बल्कि आर्थिक और सामाजिक नजरिए से भी उसे बेहद अहम समझा जाता है।

गर्मी से राहत कब तक?

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के आगे बढ़ने और प्री-मानसून गतिविधियां तेज होने के साथ कुछ इलाकों में तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि पूरे देश को तुरंत राहत मिल जाएगी। उत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक गर्मी और लू का असर बना रह सकता है। राहत धीरे-धीरे अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचेगी। फिलहाल करोड़ों लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं- कब बरसेंगे बादल? मौसम विभाग के ताजा संकेतों ने उम्मीद जरूर बढ़ाई है कि झुलसा देने वाली गर्मी के बीच राहत अब बहुत दूर नहीं हो सकती।