लद्दाख की ऊंची और कठिन पहाड़ियों में उड़ान भरना हमेशा चुनौती माना जाता है। यहां मौसम कुछ मिनटों में बदल सकता है, हवा का दबाव सामान्य इलाकों से अलग होता है और हर उड़ान अपने साथ जोखिम लेकर चलती है। ऐसे ही एक मिशन के दौरान लेह के पास तांगत्से क्षेत्र में भारतीय सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में सेना के तीन अधिकारी सवार थे, जिनमें एक मेजर जनरल भी शामिल थे। शुरुआती खबर सामने आते ही चिंता बढ़ गई, लेकिन कुछ ही समय बाद एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पूरे घटनाक्रम को नई चर्चा में ला दिया- दुर्घटना के बाद की एक सेल्फी।

हादसे के वक्त कौन था हेलीकॉप्टर में?
रिपोर्टों के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर सेना के पुराने चीता/चीतल बेड़े से जुड़ा था। इसमें मेजर जनरल सचिन मेहता के साथ दो सैन्य अधिकारी मौजूद थे। उड़ान लेह के नजदीक पर्वतीय क्षेत्र में चल रही थी, जहां ऊंचाई और मौसम दोनों सैन्य उड़ानों को बेहद जटिल बना देते हैं। हादसे में तीनों अधिकारियों को चोटें आईं, लेकिन राहत की बात यह रही कि सभी सुरक्षित बच गए। सेना ने घटना की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश भी दिए हैं।
फिर सामने आई वह सेल्फी, जिसने सबका ध्यान खींच लिया
हादसे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उस तस्वीर की हुई, जिसमें मेजर जनरल सचिन मेहता और अन्य अधिकारी दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के पास दिखाई दिए। तस्वीर में मुश्किल हालात के बावजूद चेहरे पर संयम और राहत नजर आई। एक अधिकारी विक्ट्री साइन दिखाते दिखाई दिए, जबकि पथरीले इलाके के बीच खड़े अफसरों की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। कई लोगों ने इसे “मौत को मात देने वाली तस्वीर” कहा, तो कुछ ने इसे सैनिकों के मनोबल और साहस की मिसाल बताया।
पुराने हेलीकॉप्टर बेड़े पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक पुरानी बहस फिर सामने आ गई- क्या दशकों पुराने चीता हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल अब भी सुरक्षित है? रिपोर्टों के मुताबिक, यह हेलीकॉप्टर 1970 के दशक से सैन्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। सियाचिन, लद्दाख और ऊंचाई वाले इलाकों में इनकी उपयोगिता लंबे समय तक रही, लेकिन पिछले वर्षों में इनसे जुड़े हादसों ने चिंता बढ़ाई है। सेना धीरे-धीरे इन्हें हटाकर नए लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच) शामिल करने की प्रक्रिया में है।
सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, पहाड़ों में सैन्य जिंदगी की झलक भी
यह घटना केवल एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना की कहानी नहीं है। यह उन चुनौतियों की भी याद दिलाती है, जिनका सामना सैनिक और सैन्य अधिकारी देश की सीमाओं पर हर दिन करते हैं। बर्फ, पहाड़, कम ऑक्सीजन और मुश्किल मौसम के बीच ड्यूटी निभाना सामान्य काम नहीं होता। शायद इसलिए दुर्घटना के बाद सामने आई वह सेल्फी लोगों के लिए सिर्फ एक तस्वीर नहीं रही- वह राहत, साहस और जिंदगी बचने की कहानी बन गई।
