दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Meta Platforms एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है कंपनी के अंदर लागू हो रहे नए टेक्नोलॉजी सिस्टम, जिन्हें लेकर कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है।
कंपनी के CEO Mark Zuckerberg के नेतृत्व में Meta अब AI और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल अपने इंटरनल वर्क सिस्टम में तेजी से बढ़ा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन टूल्स के जरिए कर्मचारियों की परफॉर्मेंस, काम करने का तरीका और प्रोडक्टिविटी को ज्यादा बारीकी से ट्रैक किया जा सकता है।
हालांकि Meta ने इसे सीधे तौर पर “निगरानी” नहीं कहा है, लेकिन कर्मचारियों को डर है कि इससे उनकी वर्कप्लेस प्राइवेसी कम हो सकती है। कुछ कर्मचारियों का मानना है कि अब उनके हर डिजिटल मूवमेंट पर नजर रखी जा सकती है चाहे वह काम की स्पीड हो, ऑनलाइन एक्टिविटी या टीम के साथ इंटरैक्शन।
दरअसल, Meta पहले से ही AI टेक्नोलॉजी पर बड़ा दांव खेल रही है। कंपनी कंटेंट मॉडरेशन, विज्ञापन और प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट में AI का इस्तेमाल करती रही है। अब यही टेक्नोलॉजी कर्मचारियों के मूल्यांकन (evaluation) में भी इस्तेमाल की जा सकती है।
इस बीच, कर्मचारियों में नौकरी को लेकर असुरक्षा भी बढ़ी है। पिछले कुछ समय में Meta ने बड़े स्तर पर छंटनी की थी, जिसके बाद अब इस तरह के नए सिस्टम ने कर्मचारियों की चिंता और बढ़ा दी है। उन्हें डर है कि अगर परफॉर्मेंस डेटा के आधार पर सख्त फैसले लिए गए, तो नौकरी पर खतरा आ सकता है।
वहीं, कंपनी का कहना है कि इन टूल्स का मकसद कर्मचारियों की मदद करना और काम को ज्यादा प्रभावी बनाना है, न कि उनकी जासूसी करना।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंपनियां AI के जरिए कर्मचारियों को मॉनिटर करती हैं, तो इससे पारदर्शिता तो बढ़ सकती है, लेकिन साथ ही तनाव और दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है।
Meta का यह कदम टेक्नोलॉजी के बदलते दौर को दिखाता है, जहां AI सिर्फ यूजर्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब कर्मचारियों के काम करने के तरीके को भी प्रभावित कर रहा है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह बदलाव कर्मचारियों के लिए सहूलियत बनता है या चिंता का कारण।
