मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। इस हादसे ने निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही के मूड में नहीं है। इसी कड़ी में औराई प्रखंड के 9 निजी अस्पतालों को जांच के दायरे में लिया गया है और उनसे रजिस्ट्रेशन, फायर सेफ्टी समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कागजातों में गड़बड़ी मिलने या नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में जिले के निजी अस्पतालों में हड़कंप का माहौल है और सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

प्रसाद हॉस्पिटल हादसे के बाद प्रशासन हुआ अलर्ट

मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में 4 जून को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया था। ICU में लगी आग में कई मरीजों की जान चली गई, जिसके बाद निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल उठने लगे। इस दर्दनाक हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब जिले भर के निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और स्वास्थ्य संस्थानों की जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे निर्धारित सुरक्षा मानकों और सरकारी नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

औराई के 9 निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग की नजर

प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद औराई प्रखंड के 9 निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के रडार पर आ गए हैं। विभाग ने इन अस्पतालों से रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेज, डॉक्टरों की शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता, फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र समेत कई जरूरी कागजात उपलब्ध कराने को कहा है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी अस्पताल में नियमों की अनदेखी या दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी अस्पतालों की जांच प्रक्रिया जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

पहले भी हो चुकी है सख्त कार्रवाई

प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद प्रशासन ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के खिलाफ व्यापक जांच अभियान शुरू किया था। जांच के दौरान कई संस्थानों में नियमों की अनदेखी और जरूरी मानकों में कमी पाई गई, जिसके बाद 12 से 13 निजी अस्पतालों को सील कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि अब नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों पर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।


स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को निजी अस्पतालों के लिए चेतावनी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में और भी अस्पतालों की जांच हो सकती है। प्रशासन का दावा है कि राज्यभर में स्वास्थ्य संस्थानों के सुरक्षा और संचालन मानकों की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।