NEET और JEE एग्जाम के लिए कॉम्पिटिशन अब काफी कम हो सकता है। खबर है कि सरकार बोर्ड एग्जाम के स्कोर को वेटेज देने की तैयारी कर रही है। इसका मतलब है कि एडमिशन अब सिर्फ एंट्रेंस एग्जाम के स्कोर के आधार पर नहीं होगा।NEET और JEE जैसे बड़े एंट्रेंस एग्जाम में बड़े बदलाव होने वाले हैं। सूत्रों से पता चला है कि इन एग्जाम के आधार पर एडमिशन के लिए बोर्ड एग्जाम के स्कोर को 50% वेटेज देने पर विचार किया जा रहा है। अगर सच में ऐसा होता है, तो बोर्ड एग्जाम के स्कोर का महत्व काफी बढ़ जाएगा। बताया गया है कि एक ही एग्जाम के बहुत ज़्यादा प्रेशर और स्ट्रेस को कम करने के लिए इस बदलाव पर विचार किया जा रहा है। अब तक स्टूडेंट्स बोर्ड एग्जाम से ज़्यादा NEET और JEE पर फोकस करते थे, लेकिन अगर बोर्ड स्कोर को वेटेज दिया गया, तो पूरा इक्वेशन बदल जाएगा।


क्या पेपर लीक की खबरों के बीच बड़े बदलाव की तैयारी है?

हाल ही में पेपर लीक और एग्जाम पर उठ रहे सवालों के बीच ये कदम उठाए जा रहे हैं। भारत में मौजूदा एग्जाम सिस्टम पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, इसलिए कॉम्पिटिटिव एग्जाम का वेटेज कम करना काफी असरदार साबित हो सकता है। कई दक्षिणी राज्यों ने लगातार इसकी वकालत की है। तमिलनाडु के CM जोसेफ विजय कई बार कह चुके हैं कि NEET में एडमिशन 12वीं के मार्क्स के आधार पर होना चाहिए।

कई बदलाव हो सकते हैं


एक सोर्स ने न्यूज़ एजेंसी PTI को बताया, "जिन बदलावों पर विचार किया जा रहा है, उनमें एडमिशन या मेरिट लिस्ट तैयार करने में बोर्ड के मार्क्स को 50 परसेंट वेटेज देना, एंट्रेंस एग्जाम के सिलेबस को स्कूल सिलेबस के साथ बेहतर तरीके से अलाइन करना ताकि स्टूडेंट्स की कोचिंग सेंटर्स पर डिपेंडेंस कम हो, कई एग्जाम के मौके देना और धीरे-धीरे कंप्यूटर-बेस्ड, ऑन-डिमांड टेस्ट की ओर बढ़ना शामिल है।"


अभी एडमिशन कैसे होता है?

अभी के सिस्टम में मेडिकल एडमिशन के लिए NEET एग्जाम और इंजीनियरिंग एडमिशन के लिए JEE एग्जाम देना होता है। एडमिशन इन एग्जाम में मिले स्कोर और कटऑफ के आधार पर होता है। इन एंट्रेंस एग्जाम में बैठने के लिए पासिंग स्कोर ज़रूरी है। शिक्षा मंत्रालय की नौ मेंबर वाली कमेटी अब इस सिस्टम में सुधार पर विचार कर रही है। यह वही कमेटी है जिसे पिछले साल कोचिंग सेंटर्स पर बढ़ती डिपेंडेंस और डमी स्कूलों के ट्रेंड पर नज़र रखने के लिए बनाया गया था।