eere | Source: erereनई दिल्ली। पुलिस लाठीचार्ज का नाम सुनते ही आमतौर पर सड़क पर भीड़ को नियंत्रित करने की तस्वीर सामने आती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पुलिस के हाथ में पहुंचने वाली लाठी को इस्तेमाल से पहले किस तरह जांचा जाता है? जानकारी के अनुसार, पुलिस के लिए खरीदी जाने वाली लाठी को तय मानकों पर परखा जाता है और इसकी जांच में उसकी मजबूती, सामग्री, आकार तथा इस्तेमाल के दौरान होने वाले प्रभाव जैसी बातों को देखा जाता है।

आज के समय में कई जगह पारंपरिक बांस की लाठी के स्थान पर पॉलीकार्बोनेट से बने डंडों का इस्तेमाल किया जाता है। पुलिस विभाग जब ऐसे डंडों की खरीद के लिए निविदा जारी करता है तो उसमें उत्पाद की गुणवत्ता और परीक्षण से जुड़ी शर्तें भी शामिल की जा सकती हैं। संबंधित उत्पाद को निर्धारित परीक्षणों में मानकों पर खरा उतरना होता है।

लाठी की जांच के लिए दो तरह के परीक्षण

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस की लाठी की जांच मुख्य रूप से दो तरह से की जाती है। एक परीक्षण में यह देखा जाता है कि मानव शरीर पर इसके प्रहार का प्रभाव कैसा होता है, जबकि दूसरे परीक्षण में लाठी की मजबूती जांचने के लिए उसे कठोर सतह पर मारा जाता है।

मानव शरीर से जुड़े परीक्षण का उद्देश्य यह देखना होता है कि लाठी के इस्तेमाल से होने वाला प्रभाव और दर्द किस स्तर का रहता है। ऐसे परीक्षणों के दौरान संवेदनशील शारीरिक हिस्सों को अलग रखा जाता है। बताया गया है कि सिर, गर्दन, चेहरा और ग्रोइन जैसे हिस्सों पर इस तरह का परीक्षण नहीं किया जाता।

मानव शरीर पर परीक्षण क्यों किया जाता है?

लाठी की जांच से जुड़ी जानकारी में बताया गया है कि मानव शरीर पर प्रभाव का परीक्षण इसलिए किया जाता है क्योंकि इस उपकरण का वास्तविक इस्तेमाल भी लोगों को नियंत्रित करने की परिस्थितियों में ही होना है। परीक्षण के दौरान सामान्य कपड़े पहने व्यक्ति के शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर एक हाथ से प्रहार किए जाने की प्रक्रिया बताई गई है।

इसके बाद परीक्षण में शामिल व्यक्ति से चोट और दर्द के अनुभव के बारे में जानकारी ली जाती है। दस्तावेजों में परीक्षण का उद्देश्य इस प्रभाव का आकलन करना बताया गया है कि चोट का असर और दर्द न तो बहुत कम हो और न ही अत्यधिक।

यहां यह बात महत्वपूर्ण है कि ऐसे परीक्षणों में संवेदनशील अंगों को बाहर रखा जाता है। परीक्षण का उद्देश्य उत्पाद के प्रभाव का आकलन करना बताया गया है, न कि किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाना।

25 बार कठोर सड़क पर मारकर भी होती है जांच

लाठी की मजबूती परखने का एक अलग परीक्षण भी किया जाता है। लाठीचार्ज के दौरान यदि डंडा अपने लक्ष्य से चूक जाए तो वह सड़क, दीवार या किसी अन्य कठोर सतह से टकरा सकता है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लाठी की मजबूती की जांच की जाती है।

जानकारी के अनुसार, परीक्षण के दौरान लाठी को पूरी ताकत से कठोर सड़क जैसी सतह पर 25 बार मारा जाता है। इसके बाद यह देखा जाता है कि लाठी में कोई टूट-फूट, दरार या अन्य नुकसान तो नहीं हुआ। इस परीक्षण में मजबूती के मानक पूरे करने के बाद ही उत्पाद को स्वीकृति मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

सिर्फ ताकत नहीं, सामग्री की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण

लाठी की जांच केवल उसके प्रहार या मजबूती तक सीमित नहीं होती। इसके लिए सामग्री की गुणवत्ता और उत्पाद से जुड़े प्रमाणपत्रों की भी जांच की जा सकती है। इसके लिए एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से संबंधित परीक्षण रिपोर्ट या प्रमाणपत्र देखे जा सकते हैं।

ऐसी जांच उत्पाद की आपूर्ति के समय भी की जा सकती है, ताकि पुलिस विभाग तक पहुंचने वाला सामान निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो।

पुलिस की मांग के अनुसार तय होते हैं मानक

पुलिस विभाग जब ऐसी लाठियों की खरीद करता है तो निविदा में उसकी लंबाई, सामग्री और अन्य तकनीकी विशेषताओं का उल्लेख किया जाता है। विभाग की जरूरत के अनुसार लाठी में मजबूत, खरोंचरोधी, जंगरोधी, अग्निरोधी, पारदर्शी और उच्च प्रभाव सहने जैसी विशेषताएं मांगी जा सकती हैं।

इसका मतलब यह है कि आम बोलचाल में जिसे ‘प्लास्टिक की लाठी’ कहा जाता है, वह सामान्य प्लास्टिक का डंडा नहीं होता। इसके निर्माण में ऐसी सामग्री और तकनीकी विशेषताओं को ध्यान में रखा जाता है, जिससे वह पुलिस के नियमित इस्तेमाल की परिस्थितियों में टिकाऊ रह सके।

करीब एक मीटर लंबी और 350 ग्राम तक वजन

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस तरह की पॉलीकार्बोनेट लाठी की लंबाई करीब एक मीटर होती है। इसका वजन 350 ग्राम तक बताया गया है। इसके डंडे का व्यास करीब 2.5 सेंटीमीटर और दीवार की मोटाई करीब 4 मिलीमीटर होती है।

इसे पकड़ने वाले हिस्से की लंबाई करीब 5 इंच बताई गई है। इन तकनीकी मापदंडों का उद्देश्य लाठी को पुलिस के इस्तेमाल के लिए उपयुक्त बनाना है।

लाठी की लंबी उम्र पर भी जोर

पुलिस विभाग के लिए किसी उपकरण की खरीद में केवल शुरुआती मजबूती ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसकी उपयोग अवधि भी मायने रखती है। इसलिए ऐसी लाठियों के लिए लंबी शेल्फ लाइफ की मांग भी रखी जा सकती है।

पॉलीकार्बोनेट जैसे पदार्थ से बनी लाठियों में मजबूती के साथ-साथ जंग से बचाव, आग के प्रभाव से सुरक्षा और बाहरी क्षति के प्रति प्रतिरोध जैसी विशेषताओं को शामिल करने का उद्देश्य इन्हें लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाए रखना है।

खरीद से पहले कई स्तरों पर जांच

कुल मिलाकर पुलिस के हाथ में पहुंचने वाली लाठी केवल एक साधारण डंडा नहीं होती। इसकी खरीद से पहले तकनीकी मानकों, सामग्री की गुणवत्ता, मजबूती और उपयोग के दौरान प्रभाव जैसे अलग-अलग पहलुओं की जांच की जाती है। मानव शरीर पर प्रभाव का परीक्षण और कठोर सतह पर 25 बार प्रहार वाला परीक्षण इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताए गए हैं।

इसके अलावा प्रमाणित प्रयोगशाला से जुड़े दस्तावेजों की जांच और आपूर्ति के समय गुणवत्ता की पुष्टि भी की जा सकती है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस विभाग को मिलने वाला उपकरण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप हो।