देहरादून: उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (UTU) में B.Tech सेमेस्टर एग्जाम में पेपर लीक का पता चलने के बाद यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच के बाद आरोप सही पाए गए। B.Tech थर्ड ईयर सेकंड सेमेस्टर के दो सब्जेक्ट के एग्जाम कैंसिल कर दिए गए हैं। पेपर लीक मामले में एक असिस्टेंट प्रोफेसर को दोषी पाया गया है और अगले सात साल तक यूनिवर्सिटी में एग्जाम से जुड़ी किसी भी एक्टिविटी में हिस्सा लेने पर बैन लगा दिया गया है। इस घटना ने यूनिवर्सिटी के एग्जाम सिस्टम की सिक्योरिटी और कॉन्फिडेंशियलिटी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन को ईमेल से शिकायत मिली थी कि B.Tech थर्ड ईयर सेकंड सेमेस्टर का क्वेश्चन पेपर एग्जाम से पहले कुछ स्टूडेंट्स तक पहुंच गया था। शिकायत मिलने पर यूनिवर्सिटी ने तुरंत एक जांच कमेटी बनाई। जांच में पता चला कि 'मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स' सब्जेक्ट का क्वेश्चन पेपर एग्जाम से पहले कुछ स्टूडेंट्स को WhatsApp और एक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए बांटा गया था। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद यूनिवर्सिटी ने तुरंत प्रभाव से परीक्षा रद्द कर दी।
जांच के दौरान 'इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी' विषय के प्रश्नपत्र की गोपनीयता पर भी शक जताया गया। परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इस विषय की परीक्षा रद्द करने का फैसला किया।
यूनिवर्सिटी ने इस मामले के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। उन्हें अगले सात साल तक यूनिवर्सिटी की किसी भी परीक्षा से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने से रोक दिया गया है। संबंधित कॉलेज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में मामला शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून से जुड़ा पाया गया है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने साफ किया है कि रद्द की गई दोनों परीक्षाएं अगस्त के तीसरे हफ्ते में रीशेड्यूल की जाएंगी। नई परीक्षा की तारीखें जल्द ही यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर घोषित की जाएंगी ताकि सभी छात्रों को समय पर जानकारी मिल सके।
बताया जा रहा है कि इन दोनों परीक्षाओं का असर उत्तराखंड के 12 इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्रों पर पड़ेगा। इनमें बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ़ एप्लाइड साइंसेज, THDC इंस्टीट्यूट ऑफ़ हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, शिवालिक कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, विमेंस इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी और कई दूसरे इंस्टीट्यूशन शामिल हैं।
शुरुआती जांच में पता चला कि लीक हुआ क्वेश्चन पेपर सिर्फ़ करीब 12 स्टूडेंट्स तक ही पहुंचा था। इसके बावजूद, यूनिवर्सिटी ने एग्जाम की फेयरनेस और क्रेडिबिलिटी को प्रायोरिटी देते हुए पूरी एग्जामिनेशन कैंसिल करने का फैसला किया। इस घटना से स्टूडेंट्स में भी गुस्सा फैल गया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन और ज़्यादा सुरक्षित और ट्रांसपेरेंट एग्जामिनेशन सिस्टम की मांग की। यूनिवर्सिटी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती स्टूडेंट्स और पेरेंट्स का भरोसा वापस पाना है।
