उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 के बीच इन-सर्विस (कार्यरत) शिक्षकों की TET अनिवार्यता को लेकर बहस तेज हो गई है। कई शिक्षक सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कह रहे हैं कि वर्षों तक पढ़ाने के बाद अब उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देनी पड़ रही है। इसी बीच मुख्यमंत्री ने कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग TET आयोजित करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि उन्हें पर्याप्त अवसर मिल सके। 
UPTET
'पहले बच्चे हमसे डरते थे, अब कहते हैं पहले आप परीक्षा पास करो'
कई शिक्षकों ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि पहले छात्र उनका सम्मान करते थे, लेकिन अब मजाक में यह तक कहने लगे हैं कि "पहले आप TET पास कर लीजिए।" शिक्षकों का कहना है कि दशकों की सेवा और अनुभव के बावजूद बार-बार पात्रता साबित करना उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है। यह कथन सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।
सरकार ने अलग TET कराने का दिया निर्देश
विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्यरत शिक्षकों (In-Service Teachers) के लिए अलग TET आयोजित किया जाए। सरकार का कहना है कि इससे शिक्षकों को पात्रता साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर मिलेंगे और उन्हें सीमित अवसरों की वजह से नुकसान नहीं होगा।
20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के बीच हुई परीक्षा
UPTET 2026 का आयोजन 2 से 4 जुलाई तक पांच शिफ्टों में किया गया। इस परीक्षा के लिए लगभग 20 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए AI आधारित निगरानी, कंट्रोल रूम और कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए।
शिक्षकों की मांग- अनुभव को भी मिले महत्व
कई शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता केवल लिखित परीक्षा से नहीं आंकी जा सकती। उनका मानना है कि वर्षों का शिक्षण अनुभव, कक्षा संचालन की क्षमता और छात्रों के साथ काम करने का व्यावहारिक ज्ञान भी मूल्यांकन का हिस्सा होना चाहिए। वहीं सरकार का पक्ष है कि TET शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता सुनिश्चित करने का माध्यम है और इसके लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
