
RSS नेता इंद्रेश कुमार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव से जुड़ी राजनीतिक खबर।Source : Social media
उत्तर प्रदेश में राम मंदिर से जुड़े कथित दान विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। हर दिन नेताओं की ओर से नए बयान सामने आ रहे हैं, जिससे यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी इस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार के एक बयान पर समाजवादी पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है। सपा नेताओं का कहना है कि किसी भी नेता या संगठन को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि विपक्ष किस मुद्दे पर अपनी राय रखे या क्या बोले। पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने की पूरी आजादी है। इंद्रेश कुमार के बयान और समाजवादी पार्टी की इस प्रतिक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है।
इंद्रेश कुमार के बयान पर सपा का जवाब
RSS नेता इंद्रेश कुमार के बयान पर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता मनोज काका ने कहा कि इंद्रेश कुमार कौन होते हैं यह तय करने वाले कि अखिलेश यादव किस मुद्दे पर बोलेंगे या नहीं बोलेंगे?उन्होंने कहा कि देश लोकतांत्रिक व्यवस्था से चलता है और हर राजनीतिक दल तथा उसके नेताओं को जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। किसी भी संगठन या व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह विपक्ष की आवाज़ तय करे।
RSS पर भी साधा निशाना
मनोज काका ने इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS अपनी विचारधारा को पूरे देश पर थोपने की कोशिश करता है। उन्होंने यह भी पूछा कि संगठन के देशभर में बने बड़े-बड़े कार्यालयों के निर्माण के लिए पैसा कहां से आया। सपा प्रवक्ता ने कहा कि अगर ये भवन लोगों के चंदे से बनाए गए हैं, तो चंदा देने वालों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
क्या कहा था इंद्रेश कुमार ने?
दरअसल, RSS के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में राम मंदिर से जुड़े कथित दान विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव का नाम लेते हुए सवाल किया कि अयोध्या की महिमा को बहाल करने वाले वह कौन होते हैं? साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि राम मंदिर को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय श्रद्धा और सम्मान के साथ देखा जाना चाहिए। उनके इसी बयान के बाद समाजवादी पार्टी ने कड़ा विरोध जताते हुए पलटवार किया।
राम मंदिर दान विवाद पर जारी है सियासी घमासान
राम मंदिर से जुड़े कथित दान विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति लगातार गरमाई हुई है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। समाजवादी पार्टी लगातार सरकार से इस मामले में जवाब मांग रही है और पारदर्शी जांच की मांग कर रही है। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार इन आरोपों को पहले ही खारिज कर चुके हैं। इसी विवाद को लेकर नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार तेज हो रही है और यह मामला प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।
