सांसद चंद्रेशेखर आजाद के साथ प्रेम प्रकाश Source : X- AzadSamajParty
UP politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश कैडर के 1993 बैच के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और पूर्व एडीजी प्रेम प्रकाश ने भारतीय जनता पार्टी से अपना नाता तोड़ते हुए चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का दामन थाम लिया है। नगीना से सांसद और भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इसके साथ ही प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा भी तेज हो गई है कि प्रेम प्रकाश आगामी विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसी सीट से चुनाव में उतर सकते हैं।
कौन हैं प्रेम प्रकाश? जानिए पुलिस सेवा से राजनीति तक का सफर
प्रेम प्रकाश मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले हैं और उत्तर प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने बीटेक की पढ़ाई करने के बाद पुलिस मैनेजमेंट का कोर्स किया और फिर भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए। अपने लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और जोनों में जिम्मेदारी संभाली। आगरा और मुरादाबाद में एसपी रहने के बाद वर्ष 2009 में उन्हें लखनऊ का डीआईजी बनाया गया। इसके अलावा उन्होंने कानपुर और प्रयागराज समेत कई महत्वपूर्ण स्थानों पर वरिष्ठ पदों पर कार्य किया। प्रयागराज में एडीजी के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
प्रदेश में उनकी पहचान एक सख्त, अनुशासित और तेज तर्रार अधिकारी के रूप में रही है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें कई महत्वपूर्ण सम्मान भी मिले है। पुलिस सेवा में रहते हुए उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर भी जाना गया। कानपुर जोन में तैनाती के दौरान उनके नेतृत्व में करीब 67 अपराधियों को एनकाउंटर के दौरान गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी विरोध प्रदर्शन के दौरान कानपुर में कानून व्यवस्था संभालने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को पंजाब से उत्तर प्रदेश की बांदा जेल लाने की जिम्मेदारी भी उन्होंने निभाई थी जिसकी काफी चर्चा हुई थी।
बीजेपी में शामिल होने से लेकर मोहभंग तक का सफर
सेवानिवृत्ति के कुछ महीनों बाद लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान प्रेम प्रकाश ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता प्राप्त की थी। लखनऊ स्थित बीजेपी मुख्यालय में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की मौजूदगी में उन्हें पार्टी में शामिल कराया गया था।
उस समय प्रेम प्रकाश ने कहा था कि उन्हें अब देश का कर्ज उतारने का अवसर मिला है और वह राजनीति के माध्यम से देश सेवा करना चाहते हैं। माना जा रहा था कि दलित समुदाय से आने वाले प्रेम प्रकाश के बीजेपी में शामिल होने से बहुजन समाज पार्टी के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। हालांकि, पार्टी में शामिल होने के कुछ समय बाद ही उनका बीजेपी से मोहभंग हो गया। वह संगठन की गतिविधियों में सक्रिय नहीं दिखे और किसी बड़े कार्यक्रम में भी उनकी मौजूदगी नजर नहीं आई। आखिरकार उन्होंने बीजेपी छोड़ने का फैसला कर लिया।
मायावती के करीबी रहे, अब चंद्रशेखर आजाद के साथ नई राजनीतिक पारी
प्रेम प्रकाश का प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के शासनकाल में उन्हें सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में गिना जाता था। दलित समुदाय से आने वाले प्रेम प्रकाश बसपा नेतृत्व के करीबी अधिकारियों में शामिल रहे। बसपा सरकार के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिलों में एसपी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में काम किया। समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान उन्हें अपेक्षाकृत कम अहम जिम्मेदारियां मिलीं, जबकि योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद उन्हें फिर से महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया।
अब उन्होंने चंद्रशेखर आजाद की मौजूदगी में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। पार्टी ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए उनके शामिल होने की घोषणा करते हुए उनका स्वागत किया। पार्टी ने बताया कि उत्तर प्रदेश कैडर के 1993 बैच के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और पूर्व एडीजी प्रेम प्रकाश ने 29 जून को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण की है।
पार्टी में शामिल होने के बाद प्रेम प्रकाश ने साफ कहा कि वह 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि आजाद समाज पार्टी को पूरे उत्तर प्रदेश और देशभर में मजबूत करना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके पार्टी में आने से खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आजाद समाज पार्टी को नई मजबूती मिल सकती है।
अब पुलिस सेवा के बाद प्रेम प्रकाश ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका क्या होगी और पार्टी उन्हें किस सीट से चुनाव में उतारेगी इस पर सभी की नज़रे टिकी हुई हैं।

