
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी। (फाइल फोटो)
उमर फ़ारूक़:
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बैंक खातों में जमा सैकड़ों करोड़ रुपये के स्रोत को लेकर उठे सवाल अब बड़े राजनीतिक और संगठनात्मक टकराव में बदल गए हैं। पार्टी से जुड़े तीन बैंक खातों, जिनमें लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं, पर पुलिस ने "डेबिट फ्रीज़" लगा दिया है। इससे इन खातों से निकासी और अन्य बाहरी लेन-देन पर रोक लग गई है, हालांकि खातों में धन जमा किया जा सकता है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, ये खाते एक निजी क्षेत्र के बैंक में संचालित हैं। यह कार्रवाई नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक 10 विधायकों द्वारा बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराने के बाद की गई।
विधायकों ने एफआईआर दर्ज करने और खातों में मौजूद धन के स्रोत एवं उसके लेन-देन की विस्तृत जांच की मांग की है। शिकायत में उन्होंने सवाल उठाया कि खातों में इतनी बड़ी राशि कैसे जमा हुई और क्या यह धन वैध स्रोतों से आया है या फिर किसी कथित अवैध गतिविधि से जुड़ा हुआ है।
शिकायत की एक प्रति के अनुसार, विधायकों ने कथित "कट-मनी" वसूली, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और विभिन्न घोटालों से प्राप्त रकम की जांच की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि प्रभाव के दुरुपयोग, बेईमान वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध अवैध धन संग्रह जैसी गतिविधियों से प्राप्त राशि को बैंक खातों में जमा किया गया हो सकता है।
यह घटनाक्रम हालिया विधानसभा चुनावों में TMC की हार के बाद पार्टी के भीतर तेज हुए सत्ता संघर्ष के बीच सामने आया है। पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के गुट पार्टी के संगठनात्मक और वित्तीय ढांचे पर नियंत्रण को लेकर आमने-सामने हैं।
पुलिस कार्रवाई से कुछ दिन पहले ही अरूप बिस्वास ने बैंक को पत्र लिखकर खातों की सुरक्षा और सभी लेन-देन रोकने की मांग की थी। उनका तर्क था कि नेतृत्व विवाद सुलझने तक पार्टी के 500 करोड़ रुपये से अधिक के जमा फंड को नहीं छेड़ा जाना चाहिए।
जहां अरूप बिस्वास खातों के संचालन और नियंत्रण को लेकर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे थे, वहीं बागी विधायक सीधे धन के स्रोत की आपराधिक जांच की मांग कर रहे हैं। इससे विवाद अब केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि कानूनी रूप भी ले चुका है।
ममता बनर्जी समर्थक एक वरिष्ठ विधायक ने कहा कि उनके गुट को खातों के फ्रीज़ होने की जानकारी मिली है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा, "हमें पता चला है कि तीनों खाते फ्रीज़ कर दिए गए हैं। आज शाम तक पूरी जानकारी मिल जाएगी।
इस मामले का संबंध उसी साइबर क्राइम थाने में चल रही एक अन्य जांच से भी जुड़ता है, जहां अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी की कोलकाता यात्रा से जुड़े विवाद में अरूप बिस्वास के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच की जा रही है।
इस बीच, ममता बनर्जी के करीबी विधायक कुणाल घोष ने वित्तीय मामलों में हस्तक्षेप करने के अरूप बिस्वास के अधिकार पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "किसी भी भ्रम को दूर करने के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अरूप बिस्वास पहले पार्टी के कोषाध्यक्ष थे। लेकिन 5 जून को हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में सर्वसम्मति से सुभाशीष चक्रवर्ती को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था और तब से वही इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं।
TMC के भीतर बढ़ते इस वित्तीय और राजनीतिक विवाद ने पार्टी की आंतरिक कलह को खुलकर सामने ला दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां इन खातों में जमा सैकड़ों करोड़ रुपये के स्रोत को लेकर क्या निष्कर्ष निकालती हैं।
