
तेज प्रताप पर मुकदमा, घर में घुसने और धमकी का आरोप
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में हैं। तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव के कथित रिश्तों को लेकर पहले भी कई बार राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा होती रही है, लेकिन अब इस मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। अनुष्का यादव के भाई और छात्र राजद के पूर्व अध्यक्ष आकाश यादव ने पटना सिविल कोर्ट में नालिसी मुकदमा दायर करते हुए आरोप लगाया है कि तेज प्रताप यादव उनकी भांजी उज्जयिनी से मिलने के लिए जबरन उनके घर में घुस आए थे। शिकायत में परिवार को धमकाने, दबाव बनाने और बाद में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर जान से मारने की धमकी दिलवाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। दूसरी ओर तेज प्रताप यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बताया है। मामले के अदालत तक पहुंचने के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर इस विवाद को लेकर चर्चा तेज हो गई है और अब सभी की नजर कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
रात में घर में घुसने और परिवार को धमकाने का आरोप
आकाश यादव की शिकायत के अनुसार, 6 जून की रात तेज प्रताप यादव अपने सहयोगी मोतीलाल यादव के साथ पटना के पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र स्थित उनके घर पहुंचे। आरोप है कि वह उज्जयिनी से मिलने की जिद कर रहे थे और परिवार की अनुमति के बिना घर में दाखिल हो गए। शिकायत में कहा गया है कि जब घर की महिलाओं ने गेट खोलने से इनकार किया तो शौचालय जाने का बहाना बनाकर अंदर प्रवेश किया गया। परिवार ने इसका विरोध किया तो कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। आकाश यादव का दावा है कि ऐसी घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन परिवार विवाद बढ़ने के डर से चुप रहा।
धमकी भरे कॉल, सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग का दावा
आकाश यादव ने अदालत में दायर याचिका के साथ कई डिजिटल साक्ष्य जमा करने का दावा किया है। उनके अनुसार, घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग और विदेशी नंबर से आए धमकी भरे कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग कोर्ट को सौंपी गई है। शिकायत में कहा गया है कि विरोध करने के बाद उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताते हुए पुलिस या अदालत जाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद से घर के सदस्य मानसिक तनाव और असुरक्षा की स्थिति में हैं।
एफआईआर नहीं होने पर कोर्ट पहुंचे, तेज प्रताप ने आरोपों को बताया साजिश
आकाश यादव का कहना है कि उन्होंने 10 जून को पाटलिपुत्र थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद उन्होंने अदालत में नालिसी मुकदमा दायर किया। कानूनी रूप से नालिसी मुकदमा वह प्रक्रिया है, जिसमें पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित सीधे अदालत से हस्तक्षेप की मांग करता है। अब अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी। दूसरी ओर, तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर सभी आरोपों को निराधार और राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा है कि उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला न्यायालय के विचाराधीन है और सभी आरोपों की सत्यता की जांच होना बाकी है।
