ere | Source: ereडेटिंग के दौर में कई बार दो लोग एक-दूसरे के बेहद करीब आ जाते हैं, लेकिन यह तय नहीं कर पाते कि उनका रिश्ता आखिर है क्या। न पूरी तरह दोस्ती, न स्पष्ट प्रेम संबंध—ऐसी स्थिति को आजकल ‘सिचुएशनशिप’ कहा जाता है। शुरुआत में यह रिश्ता सहज और बिना किसी दबाव वाला लग सकता है, लेकिन समय बीतने के साथ यही अनिश्चितता भावनात्मक तनाव और निराशा की वजह बन सकती है।


अगर आप बार-बार ऐसी स्थिति में फंस जाते हैं और इस बार किसी गंभीर तथा लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते की तलाश में हैं, तो रिलेशनशिप कोच जावाल भट्ट की बताई कुछ बातों को ध्यान में रखना आपके लिए उपयोगी हो सकता है।

पहली मुलाकातों में ही भविष्य की कहानी न बुनें

किसी के साथ डेटिंग शुरू होते ही शादी, परिवार या पूरी जिंदगी साथ बिताने की कल्पना करना भावनात्मक रूप से आपको बहुत जल्दी उस रिश्ते से जोड़ सकता है। शुरुआत में सामने वाले को समझने, उसकी सोच, व्यवहार, प्राथमिकताओं और जीवनशैली को जानने पर ध्यान दें। भावनाओं के बजाय समझदारी से रिश्ते को आगे बढ़ाना बेहतर है।

शुरुआत में ही बताएं कि आप चाहते क्या हैं

अगर आपका उद्देश्य केवल समय बिताना नहीं बल्कि गंभीर रिश्ता या शादी के लिए साथी तलाशना है, तो इसे छिपाने की जरूरत नहीं है। सामने वाले का ध्यान, तारीफ या भावनात्मक सहारा पाने के लिए ऐसे रिश्ते में न रहें जिसकी कोई स्पष्ट दिशा नहीं है। अपनी अपेक्षाएं साफ रखने से बाद में होने वाली गलतफहमियां कम हो सकती हैं।

सिर्फ लगातार बातचीत को प्यार की निशानी न मानें

दिनभर संदेश भेजना, फोन पर बात करना या सोशल मीडिया पर लगातार संपर्क में रहना अपने आप में मजबूत रिश्ते की गारंटी नहीं है। असली जुड़ाव एक-दूसरे की भावनाओं, विचारों और मूल्यों को समझने से बनता है। रिश्ते के साथ अपनी पढ़ाई, नौकरी, परिवार, दोस्तों और निजी जीवन के लिए भी पर्याप्त समय बचाकर रखें।

आकर्षण कितना भी हो, अपनी सीमाएं न भूलें

किसी की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक है, लेकिन इसी आकर्षण के कारण अपनी भावनात्मक और व्यक्तिगत सीमाओं को नजरअंदाज करना आगे परेशानी पैदा कर सकता है। शुरुआत में ही यह समझें कि आप रिश्ते में किन चीजों के लिए सहज हैं और किन चीजों के लिए नहीं। अपनी तय सीमाओं पर कायम रहना जरूरी है।

रिश्ता स्पष्ट होने से पहले जरूरत से ज्यादा करीब न आएं

अगर आपका लक्ष्य गंभीर रिश्ता है, तो भावनात्मक या शारीरिक रूप से बहुत तेजी से आगे बढ़ने से पहले सामने वाले की गंभीरता समझना जरूरी है। पहले यह जानें कि दोनों की अपेक्षाएं एक जैसी हैं या नहीं। इससे बाद में एकतरफा उम्मीदें बनने और भावनात्मक चोट लगने की संभावना कम हो सकती है।

रिश्ते को लेकर एक समय सीमा जरूर रखें

अगर तीन से छह महीने बीत चुके हैं, आप कई बार मिल चुके हैं और दोनों के बीच पर्याप्त समझ विकसित हो गई है, तो रिश्ते की दिशा को लेकर स्पष्ट बातचीत करना गलत नहीं है। सीधे पूछें कि सामने वाला इस रिश्ते को भविष्य में किस रूप में देखता है। ऐसे सवाल रिश्ते की वास्तविक स्थिति समझने में मदद कर सकते हैं।

हर बार बहाना मिले तो खुद को पीछे खींच लें

अगर सामने वाला बार-बार रिश्ते को नाम देने या भविष्य को लेकर बात करने से बचता है और हर बार कोई नया बहाना सामने आता है, तो इस संकेत को नजरअंदाज न करें। भावनात्मक जुड़ाव हो जाने के बाद पीछे हटना मुश्किल जरूर होता है, लेकिन लंबे समय तक अनिश्चित रिश्ते में बने रहने से ज्यादा तकलीफ हो सकती है।

सिचुएशनशिप से बचने का सबसे अहम तरीका है कि आप अपनी जरूरतों और सीमाओं को लेकर खुद स्पष्ट रहें। सामने वाले की भावनाओं और इरादों को समझने के साथ यह भी जरूरी है कि आप अपने समय और भावनात्मक ऊर्जा की कीमत पहचानें। स्पष्ट संवाद और सही सीमाएं आपको अनिश्चित रिश्ते के बजाय स्वस्थ और गंभीर संबंध की ओर बढ़ने में मदद कर सकती हैं।