"सुबह ऑफिस, रात को घर… और फिर अगले दिन वही जिंदगी।" सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर हैदराबाद की एक 25 वर्षीय सिविल इंजीनियर की भावुक पोस्ट ने लाखों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। तीन साल के अनुभव के बावजूद सिर्फ 23 हजार रुपये महीने की सैलरी, सप्ताह में छह दिन काम, परिवार के लिए समय नहीं और भविष्य को लेकर गहरी चिंता- इन सबके बीच इंजीनियर ने लिखा कि वह मानसिक रूप से पूरी तरह थक चुकी हैं। उनकी पोस्ट वायरल होने के बाद देश में वर्क-लाइफ बैलेंस, कम वेतन, मानसिक स्वास्थ्य और निजी क्षेत्र में कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों पर कई सवाल खड़े किए हैं।

काम के दबाव से जूझती इंजीनियर | फोटो: प्रतीकात्मक (AI)

'23 हजार की नौकरी, लेकिन जिंदगी सुकून गायब

वायरल पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक बड़ी निर्माण कंपनी में नौकरी शुरू की थी। तीन साल बीत जाने के बावजूद उनकी मासिक सैलरी केवल 23 हजार रुपये है, जबकि शुरुआत में उन्हें करीब 20 हजार रुपये मिलते थे। यानी तीन वर्षों में वेतन में केवल मामूली बढ़ोतरी हुई!उन्होंने लिखा कि लंबी ड्यूटी, कम वेतन और बढ़ते खर्चों के कारण न तो कोई बचत हो पा रही है और न ही भविष्य को लेकर भरोसा बचा है। किराया, यात्रा, रोजमर्रा के खर्च और परिवार की जिम्मेदारियों के बाद उनके पास लगभग कुछ भी नहीं बचता। यही वजह है कि उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय नजर आने लगा है।

6 दिन काम, एक दिन आराम... और वो भी थकान में गुजर जाता है

इंजीनियर ने बताया कि सोमवार से शनिवार तक लगातार काम करने के बाद रविवार केवल शारीरिक और मानसिक थकान दूर करने में निकल जाता है। घर लौटने के बाद उनके पास इतनी ऊर्जा भी नहीं बचती कि परिवार के साथ समय बिता सकें, घरेलू काम कर सकें या खुद के लिए कुछ समय निकाल सकें। उन्होंने लिखा कि जैसे ही रविवार खत्म होता है, फिर सोमवार आ जाता है और वही दिनचर्या दोबारा शुरू हो जाती है। लगातार काम के इस दबाव ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाला है। उन्होंने स्वीकार किया कि अब नौकरी केवल रोजी-रोटी का जरिया नहीं, बल्कि मानसिक तनाव का कारण बन चुकी है।नौकरी से परेशान इंजीनियर की वायरल Reddit पोस्ट

नौकरी से परेशान इंजीनियर की वायरल Reddit पोस्ट

नौकरी बदलना भी आसान नहीं, नोटिस पीरियड बना बड़ी परेशानी

पोस्ट में इंजीनियर ने यह भी बताया कि उन्होंने दूसरी नौकरी तलाशने की कोशिश की, लेकिन वहां भी हालात बहुत अलग नहीं हैं। सिविल इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में आज भी अधिकांश कंपनियां सप्ताह में छह दिन काम कराती हैं। इसके अलावा उन्होंने तीन महीने के नोटिस पीरियड को भी बड़ी समस्या बताया। उनका कहना है कि यदि वह जल्दी नौकरी छोड़ना चाहें तो दो महीने की सैलरी कंपनी को देनी होगी। ऐसे में कम वेतन और सीमित अवसरों के कारण बेहतर नौकरी की तलाश भी मुश्किल हो जाती है। इस अनुभव ने कई युवा पेशेवरों को अपनी कहानी साझा करने के लिए प्रेरित किया, जिन्होंने बताया कि वे भी इसी तरह के दबाव में काम कर रहे हैं।

वायरल पोस्ट के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने इसे केवल एक इंजीनियर की व्यक्तिगत परेशानी नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र के बड़े हिस्से में मौजूद कार्य संस्कृति की समस्या बताया। लोगों ने सवाल उठाया कि जब दुनिया के कई देशों में पांच दिन का कार्य सप्ताह अपनाया जा रहा है, तब भारत के कई उद्योगों में अब भी छह दिन काम क्यों कराया जाता है!विशेषज्ञों का मानना है कि कम वेतन, लंबा कार्य समय और सीमित निजी जीवन कर्मचारियों की उत्पादकता के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। इंजीनियर की यह पोस्ट केवल एक कर्मचारी की व्यथा नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं की आवाज बन गई है जो बेहतर वेतन, सम्मानजनक कार्य वातावरण और संतुलित जीवन की उम्मीद लेकर नौकरी शुरू करते हैं, लेकिन वास्तविकता अक्सर उनकी उम्मीदों से बिल्कुल अलग होती है।