प्रेग्नेंसी का समय हर महिला के लिए जिंदगी का बेहद खास दौर होता है।यह जानने के लिए कि महिला प्रेग्नेंट है या नहीं,यह पता करने के लिए हर महिला प्रेग्नेंसी किट पर भरोसा करती है,लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस किट पर लाखों महिलाएं भरोसा करती हैं, वह आखिर कैसे तय करती है कि महिला प्रेग्नेंट है? इसके पीछे शरीर में बनने वाले एक खास हार्मोन का अहम रोल होता है।

hCG हार्मोन कैसे काम करता है?

जब कोई महिला गर्भवती होती है,, तो उसके शरीर में एक खास हार्मोन बनना शुरू हो जाता है, जिसका नाम hCG होता है, यानी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन. यह हार्मोन आमतौर पर गर्भधारण के 8 से 12 दिन बाद बनने लगता है और प्रेग्नेंसी बढ़ने के साथ इसकी मात्रा भी बढ़ती जाती है।यही एचसीजी हार्मोन प्रेग्नेंसी किट की पूरी टेस्टिंग के लिए काम आता है. यह हार्मोन खून के साथ-साथ पेशाब में भी पहुंच जाता है, और इसी वजह से पेशाब से टेस्ट करना मुमकिन हो पाता है.

प्रेग्नेंसी किट के अंदर क्या होता है?

प्रेग्नेंसी किट के अंदर एक विशेष प्रकार की पट्टी लगी होती है, जिस पर एंटीबॉडी नाम के छोटे-छोटे कण मौजूद होते हैं। ये एंटीबॉडी केवल hCG हार्मोन को पहचानते हैं और किसी अन्य पदार्थ पर प्रतिक्रिया नहीं करते। जब किट पर पेशाब डाला जाता है और उसमें hCG हार्मोन मौजूद होता है, तो वह एंटीबॉडी से जुड़ जाता है।यह जुड़ाव एक केमिकल रिएक्शन शुरू करता है, जिससे रंग बदलने लगता है. यही वजह है कि किट में सिर्फ पेशाब का इस्तेमाल होता है, खून का नहीं.

दो लाइन दिखने का मतलब क्या होता है?

ज्यादातर प्रेग्नेंसी किट में दो लाइन दिखाने की व्यवस्था होती है।एक लाइन कंट्रोल लाइन कहलाती है यह बताती है कि किट सही तरीके से काम कर रही है। दूसरी टेस्ट लाइन तभी दिखाई देती है, जब पेशाब में hCG हार्मोन मौजूद होता है।अगर दोनों लाइन दिखें, तो इसका मतलब है कि महिला प्रेग्नेंट है. अगर सिर्फ एक लाइन दिखे तो इसका मतलब है कि प्रेग्नेंसी नहीं है.