आज NEET परीक्षा और पेपर लीक को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब NTA अस्तित्व में ही नहीं था, तब मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं कैसे आयोजित होती थीं? क्या उस दौर में प्रश्न पत्र ज्यादा सुरक्षित होते थे, या तब भी सिस्टम में खामियां मौजूद थीं?
आखिर कौन कराता था परीक्षा? प्रश्न पत्र कैसे छपते थे? राज्यों और केंद्र की परीक्षाओं में क्या अंतर था? और क्या उस समय भी पेपर लीक जैसे विवाद सामने आते थे?
इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमें इतिहास के उन पन्नों को पलटना होगा, जहां से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की कहानी शुरू हुई थी।
NTA से पहले कौन कराता था मेडिकल प्रवेश परीक्षा?
साल 2019 से पहले NEET का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) नहीं बल्कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) कराता था। उससे भी पहले देशभर में अलग-अलग मेडिकल कॉलेज, राज्य सरकारें और संस्थान अपनी-अपनी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करते थे।
उस दौर में छात्रों को कई अलग-अलग परीक्षाएं देनी पड़ती थीं। हर परीक्षा का पैटर्न, सिलेबस और चयन प्रक्रिया अलग होती थी।
AIPMT का दौर: मेडिकल प्रवेश का सबसे बड़ा एग्जाम
NEET से पहले देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा AIPMT (All India Pre-Medical Test) थी।
इस परीक्षा का आयोजन CBSE करता था और लाखों छात्र इसमें शामिल होते थे। मेडिकल सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन थी, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया अपेक्षाकृत सीमित स्तर पर संचालित होती थी।
कितना सुरक्षित था क्वेश्चन पेपर?
विशेषज्ञों के अनुसार उस समय प्रश्न पत्रों की सुरक्षा पूरी तरह मैनुअल सिस्टम पर आधारित थी।
प्रश्न पत्रों की छपाई बेहद गोपनीय स्थानों पर होती थी।
सीलबंद पैकेटों में पेपर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाते थे।
कई स्तरों पर सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की निगरानी रहती थी।
परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले ही पैकेट खोले जाते थे।
हालांकि सुरक्षा के ये उपाय मजबूत माने जाते थे, लेकिन तकनीक की कमी के कारण निगरानी के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं थे।
क्या तब भी सामने आते थे पेपर लीक के मामले?
बहुत से लोगों को लगता है कि पेपर लीक की समस्या केवल आज की है, लेकिन ऐसा नहीं है।
साल 2015 में AIPMT परीक्षा पेपर लीक विवाद के कारण चर्चा में आ गई थी। जांच एजेंसियों ने बड़े स्तर पर गड़बड़ियों का खुलासा किया था, जिसके बाद परीक्षा दोबारा आयोजित करनी पड़ी थी।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि परीक्षा प्रणाली चाहे किसी भी संस्था के पास हो, सुरक्षा चुनौतियां हमेशा मौजूद रहती हैं।
फिर क्यों बनाई गई NTA?
परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, पेशेवर और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 2017 में National Testing Agency (NTA) की स्थापना की।
इसके बाद 2019 से NEET सहित कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की जिम्मेदारी NTA को सौंप दी गई।
उम्मीद थी कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी और बेहतर प्रबंधन के जरिए परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सकेगा।
सबसे बड़ा सवाल: क्या पहले का सिस्टम बेहतर था?
यह कहना आसान नहीं है कि पुराना सिस्टम बेहतर था या नया। दोनों व्यवस्थाओं की अपनी-अपनी चुनौतियां और सीमाएं रही हैं।
एक तरफ पुराने दौर में परीक्षाओं का दायरा सीमित था, वहीं दूसरी तरफ आज करोड़ों अभ्यर्थियों के लिए विशाल स्तर पर परीक्षा आयोजित करना बड़ी जिम्मेदारी बन चुका है।
लेकिन इतना जरूर है कि हर विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं और सुधार की मांग तेज हो जाती है।
NTA आने से पहले मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की दुनिया पूरी तरह अलग थी। CBSE, AIPMT और विभिन्न राज्य स्तरीय परीक्षाओं का अपना अलग ढांचा था। सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी, लेकिन चुनौतियां भी थीं। आज जब NEET और परीक्षा सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तब अतीत को समझना और वर्तमान से तुलना करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
