शरद पवार और कांग्रेस नेताओं के बीच एनसीपी-कांग्रेस विलय को लेकर चल रही चर्चा। | Source: Social media

शरद पवार और कांग्रेस नेताओं के बीच एनसीपी-कांग्रेस विलय को लेकर चल रही चर्चा।Source : Social media

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की चर्चा तेज़ हो गई है। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी और कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर चर्चाएं अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही हैं। जानकारी के मुताबिक, नई दिल्ली में दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो रही है और बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भी पुष्टि की है कि विलय को लेकर पार्टी हाईकमान के साथ चर्चा जारी है। हालांकि, अभी तक दोनों दलों की ओर से किसी आधिकारिक समझौते या विलय की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। अगर यह विलय होता है, तो राज्य की राजनीति के साथ-साथ विपक्षी दलों की रणनीति पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

दिल्ली में जारी है अहम बैठकें

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि एनसीपी और कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर पार्टी हाईकमान के स्तर पर लगातार बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि जो नेता कांग्रेस और शरद पवार की धर्मनिरपेक्ष सोच में विश्वास रखते हैं, उनके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं। बताया जा रहा है कि नई दिल्ली में दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं और अब बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है।

कांग्रेस ने दिखाई सकारात्मक सोच

कांग्रेस नेतृत्व ने एनसीपी यानी शरदचंद्र पवार के उन सांसदों और विधायकों को पार्टी में शामिल करने पर सकारात्मक रुख दिखाया है, जो कांग्रेस में आना चाहते हैं। हालांकि, अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान और वरिष्ठ नेताओं की अगली बैठक के बाद ही यह साफ होगा कि दोनों दलों का विलय होगा या सिर्फ कुछ नेता कांग्रेस में शामिल होंगे। इसके बाद ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

1999 में कांग्रेस से अलग होकर बनाई थी एनसीपी

शरद पवार ने साल 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP की स्थापना की थी। इसके बाद एनसीपी महाराष्ट्र की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों में शामिल हो गई और कई वर्षों तक राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाती रही। लेकिन साल 2023 में पार्टी में बड़ा राजनीतिक संकट आया, जब शरद पवार के भतीजे अजित पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ अलग हो गए और भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम के बाद एनसीपी दो अलग-अलग गुटों में बंट गई।

पार्टी के भीतर अलग-अलग राय

एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के भीतर भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर नेताओं की राय एक जैसी नहीं है। पार्टी का एक वर्ग कांग्रेस के साथ विलय को बेहतर विकल्प मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग किसी नए राजनीतिक रास्ते पर आगे बढ़ने के पक्ष में है। कुछ नेताओं का मानना है कि अगर पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाती है, तो उनके क्षेत्रों के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में आसानी होगी।बताया जा रहा है कि विपक्ष में रहने की वजह से कई नेताओं को अपने विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में विकास से जुड़े काम कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी कारण पार्टी के भीतर भविष्य को लेकर अलग-अलग सुझाव सामने आ रहे हैं।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

एनसीपी और कांग्रेस के संभावित विलय की चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब देश की कई क्षेत्रीय पार्टियां अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नई रणनीति बना रही हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आगामी चुनावों से पहले विपक्षी दल अपने संगठन को मजबूत करने और नए राजनीतिक समीकरण तैयार करने में जुटे हैं।हालांकि, अभी तक कांग्रेस और एनसीपी की ओर से विलय को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है और अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि दिल्ली में चल रही बैठकों के बाद दोनों पार्टियां इस मुद्दे पर क्या अंतिम फैसला लेती हैं।