मुजफ्फरपुर में सैनिटरी पैड बनातीं जीविका दीदियां। | Source: Chrome

मुजफ्फरपुर में सैनिटरी पैड बनातीं जीविका दीदियां।Source : Chrome

मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड की सरमस्तपुर पंचायत में जीविका से जुड़ी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। यहां 'सच्ची सहेली स्वावलंबी सहकारी समूह' के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं सैनिटरी पैड का निर्माण कर रही हैं। इस पहल से जहां दर्जनों महिलाओं को रोजगार मिला है, वहीं गांवों में मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर भी तेजी से जागरूकता बढ़ रही है। सरकार की मदद से शुरू हुई यह पहल अब ग्रामीण महिलाओं के लिए आय और सम्मान दोनों का जरिया बन चुकी है।

सरकारी सहयोग से शुरू हुई पहल

समूह की अध्यक्ष गुड़िया देवी के अनुसार, इस यूनिट की शुरुआत सरकार से मिली 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता से की गई। उत्पादन शुरू करने से पहले समूह की सभी महिलाओं को दिल्ली से आए प्रशिक्षकों ने मशीन संचालन, सैनिटरी पैड निर्माण, पैकिंग और गुणवत्ता नियंत्रण का विशेष प्रशिक्षण दिया। फिलहाल इस यूनिट में 31 जीविका दीदियां नियमित रूप से काम कर रही हैं।

हर महीने तैयार हो रहे हजारों पैकेट

यूनिट में प्रतिदिन करीब 2,500 से 3,000 सैनिटरी पैड तैयार किए जा रहे हैं। एक पैड बनाने की लागत लगभग 3 रुपये आती है। छह पैड का एक पैकेट तैयार किया जाता है, जिसकी खुदरा कीमत 45 रुपये और थोक कीमत 28 रुपये तय की गई है। हर महीने करीब 10 हजार पैकेट तैयार किए जा रहे हैं। इनकी आपूर्ति गांवों के अलावा वेलफेयर विभाग और कई गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO) को भी की जा रही है।

ग्रामीण महिलाओं में बढ़ रही जागरूकता

गुड़िया देवी बताती हैं कि पहले गांवों में अधिकतर महिलाएं मासिक धर्म के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती थीं। लेकिन अब सैनिटरी पैड के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है। समूह का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को कम कीमत पर बेहतर गुणवत्ता वाले सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना है, ताकि वे सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से मासिक धर्म का प्रबंधन कर सकें।

रोजगार के साथ बढ़ा आत्मविश्वास

समूह से जुड़ी रेनू कुमारी बताती हैं कि पहले वे केवल घर के काम तक सीमित थीं, लेकिन अब इस यूनिट से जुड़ने के बाद उनकी नियमित आमदनी होने लगी है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। समूह की महिलाएं गांव-गांव जाकर सैनिटरी पैड के उपयोग के फायदे भी बता रही हैं और महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रही हैं।

गांव की महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

सरमस्तपुर की यह पहल सिर्फ सैनिटरी पैड बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का भी माध्यम बन गई है। स्थानीय स्तर पर तैयार हो रहे ये सैनिटरी पैड अब आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई पहचान बनते जा रहे हैं।