ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ मीडिया से बातचीत करते हुए, ईरान-अमेरिका समझौते और इजरायल पर बयान देते हुए। | Source: Social media

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ मीडिया से बातचीत करते हुए, ईरान-अमेरिका समझौते और इजरायल पर बयान देते हुए।Source : Social media

ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए समझौते को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। ईरान का कहना है कि यह समझौता सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की राजनीति के लिए भी अहम साबित हो सकता है। इसी बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इजरायल इस समझौते को सफल नहीं होने देना चाहता। उनका आरोप है कि हाल के दिनों में लेबनान में बढ़ी सैन्य गतिविधियां भी इसी रणनीति का हिस्सा हैं। गालिबाफ ने यह भी कहा कि इस समझौते से अमेरिका और इजरायल दोनों को राजनीतिक झटका लगा है और इसी वजह से इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

समझौते को रोकना चाहता है इजरायल

ईरानी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने एक टीवी इंटरव्यू में बताया कि हाल ही में उन्होंने स्विट्जरलैंड का दौरा किया था। इस यात्रा का उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच हुए 14 बिंदुओं वाले इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) को आगे बढ़ाना और उसकी शर्तों पर काम करना था। लेकिन इस दौरान लेबनान में बढ़े तनाव और सैन्य घटनाओं की वजह से प्रक्रिया प्रभावित हुई।गालिबाफ का कहना है कि इजरायल शुरू से ही इस समझौते का विरोध कर रहा है। उनके मुताबिक, समझौते में लेबनान में युद्ध समाप्त करने, देश की संप्रभुता बहाल करने, विस्थापित लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने और कब्जे वाले इलाकों से सेना हटाने जैसी महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं। उनका आरोप है कि इजरायल नहीं चाहता कि ये शर्तें लागू हों।

यह अमेरिका और इजरायल की हार का दस्तावेज

गालिबाफ ने कहा कि ईरान की नजर में यह समझौता अमेरिका और इजरायल की नीतियों की असफलता को दिखाता है। उन्होंने दावा किया कि इसी कारण इजरायल लगातार ऐसे कदम उठा रहा है, जिससे समझौते का क्रियान्वयन रुक जाए। उनके अनुसार, अगर समझौता पूरी तरह लागू होता है तो लेबनान में स्थायी शांति स्थापित हो सकती है और वहां के लोगों को अपने घर लौटने का मौका मिलेगा।

अमेरिकी सरकार में मतभेद का भी दावा

ईरानी संसद अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि इस समझौते को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी एक जैसी राय नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के विचार अलग-अलग हैं। गालिबाफ के मुताबिक, हाल के दिनों में मार्को रुबियो के कुछ कदम इस समझौते की भावना के विपरीत दिखाई दिए।उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के कुछ नेता फारस की खाड़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ऐसा रुख अपना रहे हैं, जिससे समझौते को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने रुख पर कायम है और समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।