हैदराबाद में मुशायरे का आयोजन। | Source: Chrome

हैदराबाद में मुशायरे का आयोजन।Source : Kalamlok

जश्न-ए-आजादी के मौके पर सदा-ए-अदब के तत्वावधान में 15 अगस्त को टैलेंट पार्क हाई स्कूल, टोली चौकी में एक शानदार मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के लगभग 20 युवा शायरों ने शिरकत की और अपने चुनिंदा कलाम पेश कर श्रोताओं को खूब प्रभावित किया।मुशायरे के मुख्य अतिथि प्रोफेसर मोहम्मद मुशाहिद, डीन, स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग मानू हैदराबाद रहे । उनके हाथों शमा रोशन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसके बाद युवा शायरों ने अपने कलाम के माध्यम से देशभक्ति, सामाजिक सरोकारों और उर्दू अदब के विभिन्न पहलुओं को खूबसूरती से प्रस्तुत किया।

हौसला

इस अवसर पर युवा शायरों की हौसला-अफजाई और सम्मान के लिए एक विशेष समारोह भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. शाएमा शोहरवरदी, फाउंडर एवं CEO, M&M Global Health Connect, हैदराबाद थीं। उन्होंने युवा शायरों की साहित्यिक प्रतिभा और उनकी सेवाओं की सराहना करते हुए सभी को मुबारकबाद दी और कहा कि नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने के लिए ऐसे कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं।

मज़हर

मुशायरे की निजामत  मजहर सुब्हानी ने की। कार्यक्रम में उर्दू साहित्य से जुड़े लोगों के अलावा बड़ी संख्या में शेर-ओ-अदब के शौकीनों ने भी हिस्सा लिया और युवा शायरों का उत्साह बढ़ाया।कार्यक्रम में कलम लोक हिंदी मीडिया समूह ने मीडिया पार्टनर के रूप में अपनी सहभागिता निभाई। मीडिया पार्टनर के तौर पर कलम लोक ने इस साहित्यिक आयोजन को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने और युवा शायरों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने में सहयोग किया।

सलमान

सदा-ए-अदब के अध्यक्ष डॉ. सलमान सिद्दीकी ने कहा कि सदा-ए-अदब उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए लगातार काम कर रही है। खास तौर पर युवा पीढ़ी में उर्दू भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि पैदा करना और उन्हें अपनी रचनात्मक प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए मंच उपलब्ध कराना संगठन का प्रमुख उद्देश्य है।संगठन के सचिव और वरिष्ठ पत्रकार अशर यासर ने कहा कि सदा-ए-अदब देश के विभिन्न क्षेत्रों में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को अपनी प्रतिभा सामने लाने का अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य उर्दू साहित्य को अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाना और नई पीढ़ी को उर्दू शायरी एवं अदब से जोड़ना है।  इस मुशायरे मे उभरते हुए शायर शाहजान खां, शायर बाबर, शांतनु मिश्रा, सचिन झा, फातिमा, शायमा, जुबैर, मोइन ज़फ़र, सईद मोइन, नुसरत परवीन, दयाज़ बलराम पूरी, अब्दुल अंसारी, फैजुद्दीन, शादाब बाज, आकाश पांडेय, अबू होरैरा, जहांगीर आलम, सोहेल मानुवि आदि शायरो आज़ादी के जशन मे अपने कलाम से समा बांधी l

कलमलोक

कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों और साहित्य प्रेमियों ने सदा-ए-अदब की ओर से युवा शायरों को उपलब्ध कराए जा रहे इस साहित्यिक मंच की सराहना की। उपस्थित लोगों ने कहा कि उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार तथा नई पीढ़ी को अदब से जोड़ने के लिए इस तरह की गतिविधियां आज के दौर की महत्वपूर्ण जरूरत हैं। सदा ए अदब देश के विभिन्न हिस्सों मे उर्दू अदब और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा है और अलग अलग शहरों मे युवाओं की प्रतिभा निखारने का मौका देता है l