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सुबह बिस्तर से उठते ही जमीन पर पैर रखते समय यदि एड़ियों या तलवों में तेज दर्द महसूस होता है, पैरों में जलन, बार-बार ऐंठन, झुनझुनी या सुन्नपन की शिकायत रहती है, तो इसे सामान्य थकान या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पैरों और एड़ियों में लगातार रहने वाला दर्द कई बार शरीर में आवश्यक विटामिन और खनिजों की कमी का संकेत हो सकता है। हमारा शरीर विभिन्न लक्षणों के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का संकेत देता है और इन संकेतों को समय रहते समझना जरूरी है।


कई लोग एड़ियों और पैरों के दर्द को अधिक चलने, लंबे समय तक खड़े रहने, बढ़ती उम्र या सामान्य कमजोरी का परिणाम मान लेते हैं। हालांकि यदि यह परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसके पीछे विटामिन डी, विटामिन B12, आयरन, मैग्नीशियम या पोटैशियम की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। समय पर जांच और उचित उपचार न मिलने पर यह समस्या आगे चलकर अधिक गंभीर रूप ले सकती है।


विटामिन D की कमी के संकेत

यदि एड़ियों, तलवों या पिंडलियों में लगातार दर्द बना रहता है या मांसपेशियों में असहजता महसूस होती है, तो यह विटामिन डी की कमी का संकेत हो सकता है। विटामिन डी शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण के लिए आवश्यक होता है, जिससे हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत बनी रहती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, विटामिन डी की कमी होने पर पैरों और टांगों की मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई, हड्डियों में गहरा दर्द और शारीरिक क्षमता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि इसकी कमी अधिक गंभीर हो जाए, तो मांसपेशियों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।


विटामिन B12 की कमी से नसों पर पड़ता है असर

विटामिन B12 शरीर में रेड ब्लड सेल्स के निर्माण और नसों के स्वस्थ कार्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। इसकी कमी होने पर सबसे पहले पैरों और हाथों की नसों पर प्रभाव दिखाई दे सकता है।

विटामिन B12 की कमी से पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन, जलन, सुई चुभने जैसा एहसास और नसों से जुड़ी अन्य समस्याएं हो सकती हैं। बुजुर्गों, शाकाहारी लोगों तथा पाचन संबंधी बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों में इसकी कमी का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है।


थोड़ा चलने पर ही थकान होना आयरन की कमी का संकेत

यदि थोड़ी दूरी चलने के बाद ही पैरों में अत्यधिक थकान, भारीपन या कमजोरी महसूस होने लगे, तो यह शरीर में आयरन की कमी का संकेत हो सकता है। आयरन की कमी से एनीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे शरीर के विभिन्न ऊतकों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।

आयरन की कमी के कारण पैरों में कमजोरी, जल्दी थकान और भारीपन महसूस हो सकता है। कुछ मामलों में आयरन की कमी से रेस्टलेस लेग सिंड्रोम का जोखिम भी बढ़ सकता है, हालांकि प्रत्येक रेस्टलेस लेग सिंड्रोम का कारण आयरन की कमी नहीं होता।


मैग्नीशियम और पोटैशियम की कमी भी बन सकती है वजह

मैग्नीशियम शरीर की मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के सामान्य कार्य के लिए आवश्यक खनिज है। इसकी कमी होने पर रात के समय पैरों में बार-बार ऐंठन, मांसपेशियों में खिंचाव और कमजोरी की समस्या हो सकती है।

इसी प्रकार पोटैशियम एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट है, जो मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में पोटैशियम की कमी होने पर पैरों की मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी, थकान और कई बार चलने-फिरने में भी परेशानी महसूस हो सकती है।


कब लें डॉक्टर की सलाह

यदि पैरों में दर्द, एड़ियों में लगातार तकलीफ, झुनझुनी, सुन्नपन, कमजोरी, जलन या बार-बार ऐंठन लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क कर आवश्यक जांच करानी चाहिए, ताकि विटामिन और अन्य पोषक तत्वों की कमी का समय पर पता लगाकर उचित उपचार शुरू किया जा सके।