erer | Source: erereनई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के दो दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली और रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। दोनों खिलाड़ी 35 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और अब केवल एक प्रारूप में खेल रहे हैं। ऐसे में अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप में उनकी संभावित भागीदारी को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इस बहस के बीच भारत के महान स्पिनर हरभजन सिंह ने दोनों खिलाड़ियों का खुलकर समर्थन किया है।

हरभजन सिंह ने कहा है कि यदि 39 वर्ष की उम्र में लियोनेल मेसी विश्व कप में खेल सकते हैं, तो विराट कोहली और रोहित शर्मा के लिए ऐसा करना असंभव क्यों माना जाए। उनका कहना है कि किसी खिलाड़ी की उम्र को उसके चयन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके बजाय मैदान पर उसका प्रदर्शन, फिटनेस, कौशल और खेल के प्रति प्रतिबद्धता सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

हरभजन ने उम्र की बहस पर उठाया बड़ा सवाल

पीटीआई के मुख्यालय में एक पॉडकास्ट साक्षात्कार के दौरान 46 वर्षीय पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने विराट कोहली और रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा पैमाना उसका प्रदर्शन होना चाहिए, न कि उसकी उम्र।

हरभजन के मुताबिक यदि विराट कोहली और रोहित शर्मा अभी भी उच्च स्तर पर प्रदर्शन करने में सक्षम हैं और टीम के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं, तो केवल उम्र के आधार पर उन्हें बाहर करने की बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दोनों खिलाड़ियों की फिटनेस और अनुभव को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया।

मेसी का उदाहरण देकर कोहली-रोहित का किया समर्थन

हरभजन सिंह ने विराट कोहली और रोहित शर्मा के समर्थन में लियोनेल मेसी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि मेसी ने 39 वर्ष की उम्र में भी विश्व कप स्तर पर अपनी क्षमता साबित की। ऐसे में अगर कोई क्रिकेटर भी उम्र बढ़ने के बावजूद अपनी फिटनेस और कौशल को बनाए रखता है, तो उसे केवल उम्र के आधार पर रोकना उचित नहीं होगा।

हरभजन ने कहा, "खिलाड़ी कोई भी हो, मेरा मानना है कि मापदंड प्रदर्शन होना चाहिए, उम्र नहीं।" उन्होंने रोहित और कोहली की अब तक की प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ी भी मेसी की तरह उम्र को पीछे छोड़कर अपने प्रदर्शन से जवाब दे सकते हैं।

39 साल के विराट पर हरभजन का बड़ा भरोसा

अगले साल दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में वनडे विश्व कप होने के समय विराट कोहली 39 वर्ष और रोहित शर्मा 40 वर्ष के हो जाएंगे। इसी उम्र को लेकर उठ रहे सवालों पर हरभजन ने कहा कि अगर विराट 39 साल की उम्र में भी मैदान पर 20 साल के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ रहे हैं तो उनकी उम्र मायने नहीं रखती।

हरभजन ने कहा, "विराट भले ही 39 साल के हों, लेकिन अगर वह अभी भी मैदान पर 20 साल के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ रहे हैं, तो उनकी उम्र मायने नहीं रखती। लियोनेल मेस्सी को ही देख लीजिए। 40 (39) साल की उम्र में भी पांच खिलाड़ी उन्हें रोक नहीं पाते। अगर किसी खिलाड़ी के पास ऐसी फिटनेस और कौशल हो कि पांच विरोधी भी उसे रोक न सकें, तो हम जानते हैं कि कौशल ही सर्वोपरि है।"

विराट कोहली ने खिलाड़ियों में जीत का भरोसा जगाया

हरभजन सिंह ने विराट कोहली के योगदान को याद करते हुए उनकी मानसिकता की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि कोहली ने खिलाड़ियों के भीतर यह विश्वास पैदा किया कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उनके मुताबिक कोहली ने भारतीय क्रिकेट में जीत को लेकर एक अलग तरह का आत्मविश्वास पैदा करने में भूमिका निभाई।

हरभजन ने यह भी बताया कि फिटनेस के मामले में विराट कोहली ने उन्हें खुद आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कोहली की फिटनेस को देखकर उन्हें यह एहसास हुआ कि एक खिलाड़ी अपनी क्षमता के बारे में जितना सोचता है, उससे कहीं अधिक हासिल कर सकता है।

गौतम गंभीर को हरभजन की सलाह, अनुभव पर करें भरोसा

हरभजन सिंह ने मुख्य कोच गौतम गंभीर को भी एक तरह की सलाह देते हुए कहा कि उन्हें विराट कोहली और रोहित शर्मा के अनुभव पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण देते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी में प्रतिभा जरूर हो सकती है, लेकिन बड़े टूर्नामेंट में अनुभव की अपनी अलग अहमियत होती है।

हरभजन ने कहा, "अगर मैं कोच होता तो मेरा काम उन्हें मंच प्रदान करना होता, क्योंकि रोहित और विराट से मेरी अपेक्षाएं वैभव सूर्यवंशी से कहीं अधिक होतीं। इन दोनों के पास अनुभव है। इनके पास 300 मैचों का अनुभव है जो सूर्यवंशी के पास नहीं है। यह जरूर है सूर्यवंशी आकर गेंदबाजों की जमकर धुनाई कर सकते हैं, लेकिन विराट और रोहित के पास वो अनुभव है।"

प्रदर्शन अच्छा है तो उम्र को क्यों बनाया जाए आधार?

हरभजन ने साफ कहा कि भारतीय टीम में चयन के लिए फिटनेस और प्रदर्शन को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि अगर विराट कोहली और रोहित शर्मा रन बना सकते हैं और श्रेयस अय्यर तथा यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ियों के स्तर की फिटनेस बनाए रखते हैं, तो केवल उम्र उनके खिलाफ जाने का कारण नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "फिटनेस हमारी प्राथमिकता है और प्रदर्शन मायने रखता है। प्रदर्शन ही अंतिम मापदंड है। इसलिए यदि ये दोनों खिलाड़ी रन बना सकते हैं और श्रेयस या यशस्वी जैसी फिटनेस रखते हैं तो बाकी कुछ भी मायने नहीं रखता।"

हरभजन ने अपने करियर का अनुभव भी साझा किया

हरभजन सिंह ने इस दौरान अपने शानदार क्रिकेट करियर का अनुभव भी साझा किया। जालंधर के रहने वाले हरभजन ने टेस्ट क्रिकेट में 416 विकेट और वनडे क्रिकेट में 269 विकेट हासिल किए। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी आमतौर पर अपने शरीर और प्रदर्शन के जरिए समझने लगते हैं कि उनके करियर का अंत कब करीब आ गया है।

हरभजन ने अपने संन्यास का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने आधिकारिक तौर पर दिसंबर 2021 में संन्यास लिया था, लेकिन उनका आखिरी टेस्ट मैच 2015 में गॉल में श्रीलंका के खिलाफ हुआ था। उस मुकाबले में दिनेश चांदीमल ने उनकी गेंदों की जमकर धुनाई की थी। हरभजन के मुताबिक उस प्रदर्शन के बाद उन्हें महसूस हुआ कि शायद लाल गेंद के क्रिकेट को अलविदा कहने का समय आ गया है।

35 की उम्र के बाद शरीर से करनी पड़ती है ज्यादा मेहनत

हरभजन ने कहा कि 35 वर्ष की उम्र पार करने के बाद किसी खिलाड़ी से 18 या 20 साल की उम्र जैसा प्रदर्शन लगातार करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। इस उम्र में खिलाड़ी को अपने शरीर और फिटनेस पर पहले से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

उन्होंने कहा, "आपको तब अहसास होता है जब आप उस मुकाम पर पहुंच जाते हैं जहां अगर आपको खेलना जारी रखना है, तो आपको पहले से ज्यादा मेहनत करनी होगी। आप 35 साल से अधिक उम्र के हैं और आपसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि आप वही करें जो आप 18 या 20 साल की उम्र में करते थे।"

हरभजन के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ खिलाड़ी के सामने चुनौती यह होती है कि वह अपने प्रदर्शन के स्तर को किस तरह बनाए रखता है। लंबे करियर में कई खिलाड़ी प्रदर्शन में आई गिरावट से वापसी करने में सफल होते हैं, जबकि कुछ खिलाड़ी एक समय के बाद खुद महसूस करते हैं कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है।

अंतिम फैसला खिलाड़ियों को खुद लेना चाहिए

हरभजन सिंह का मानना है कि विराट कोहली और रोहित शर्मा के भविष्य का अंतिम जवाब दोनों खिलाड़ियों के भीतर ही मौजूद है। उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी उस मुकाम पर पहुंचता है जहां उसे अपने करियर को लेकर फैसला लेना होता है, तब उसका शरीर और उसका प्रदर्शन उसे संकेत देने लगता है।

उन्होंने कहा, "रोहित और विराट को इसका जवाब अपने भीतर से ही मिलेगा। आपको तब अहसास होता है जब आप उस मुकाम पर पहुंच जाते हैं जहां आपको संन्यास लेना पड़ता है।"

हरभजन ने यह भी कहा कि अगर किसी खिलाड़ी में खेलते रहने का साहस और क्षमता है तो उसे आगे बढ़ने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। लेकिन अगर शरीर साथ नहीं दे रहा हो और प्रदर्शन लगातार प्रभावित हो रहा हो, तो खिलाड़ी को अपने शरीर की बात भी सुननी चाहिए।

वनडे विश्व कप में विराट-रोहित की मौजूदगी पर बहस जारी

विराट कोहली और रोहित शर्मा की उम्र को लेकर बहस आने वाले समय में भी जारी रहने की संभावना है। अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप के समय दोनों की उम्र क्रमशः 39 और 40 वर्ष होगी। ऐसे में टीम चयन, फिटनेस और प्रदर्शन को लेकर हरभजन सिंह की टिप्पणी इस बहस को एक नया नजरिया देती है।

हरभजन का संदेश स्पष्ट है कि क्रिकेट में किसी खिलाड़ी की उम्र से अधिक महत्वपूर्ण उसका वर्तमान प्रदर्शन, फिटनेस, कौशल और टीम के प्रति प्रतिबद्धता है। अगर कोई अनुभवी खिलाड़ी इन कसौटियों पर खरा उतरता है, तो उसके लिए उम्र को अकेला आधार बनाकर फैसला नहीं किया जाना चाहिए।