जेद्दा: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ओल्ड बॉयज़ एसोसिएशन (AMUOBA) की जेद्दा शाखा ने हज 2026 के दौरान भारतीय हज यात्रियों की सेवा करने वाले स्वयंसेवकों के सम्मान में ‘तक़रीब-ए-तहसीन: ख़ादिमान-ए-हुज्जाज के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम उन लोगों को समर्पित था, जिन्होंने हज के दौरान निस्वार्थ भाव से यात्रियों की मदद की और उनकी यात्रा को सुरक्षित व सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हज मिशन की ऐतिहासिक सफलता और स्वयंसेवकों की अहम भूमिका
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए AMUOBA जेद्दा के अध्यक्ष डॉ. प्रिंस मुफ्ती जियाउल हसन ने कहा कि हज यात्रियों की सेवा करना एक सम्मान के साथ-साथ एक पवित्र जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी व्यवस्था केवल प्रशासनिक योजनाओं के आधार पर सफल नहीं हो सकती। स्वयंसेवकों की संवेदनशीलता, धैर्य और सेवा भावना ही इस अभियान को सफल बनाती है। उन्होंने भारतीय हज मिशन, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, हज कमेटी ऑफ इंडिया, जेद्दा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास और सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष भारतीय हज मिशन को सऊदी अरब के हज और उमरा मंत्रालय की ओर से समन्वय और संचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पहली बार दो प्रतिष्ठित ‘लब्बैतुम अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।

इंडियन कम्युनिटी मक्का के बैनर तले एकजुट हुए स्वयंसेवक
हज 2026 के दौरान सभी स्वयंसेवकों ने ‘इंडियन कम्युनिटी मक्का’ (ICM) के बैनर तले काम किया। जेद्दा में भारत के महावाणिज्य दूत फहद अहमद खान सूरी की इस पहल का उद्देश्य भारतीय समुदाय के स्वयंसेवकों को एक मंच पर लाकर उनके कार्यों को व्यवस्थित करना था। कार्यक्रम के दौरान इंजीनियर फजल मोहम्मद के योगदान की भी विशेष रूप से सराहना की गई, जिन्होंने स्वयंसेवकों के समन्वय और उनकी तैनाती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्वयंसेवकों की मौजूदगी ने हज यात्रियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाई।
महावाणिज्य दूत ने बताई हज मिशन की चुनौतियां और उपलब्धियां
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और जेद्दा में भारत के महावाणिज्य दूत फहद अहमद खान सूरी ने कहा कि 1,75,025 भारतीय हज यात्रियों के लिए आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं, भोजन, सामान और आपातकालीन सहायता जैसी व्यवस्थाओं का संचालन बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। उन्होंने बताया कि भारतीय हज मिशन, सऊदी प्रशासन, चिकित्सा टीमों, हज कमेटी और स्वयंसेवकों के बीच बेहतर समन्वय के कारण यह अभियान सफल रहा। उन्होंने यह भी बताया कि इतने बड़े अभियान के बावजूद केवल दो मामलों में सामान खोने की शिकायत दर्ज हुई, जो इस मिशन की कार्यकुशलता को दर्शाता है। उन्होंने AMUOBA जेद्दा के इस आयोजन को स्वयंसेवकों के सम्मान में उठाया गया एक अनूठा और सराहनीय कदम बताया।

सम्मान समारोह के साथ कृतज्ञता और सामुदायिक एकता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों को प्रमाण-पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कई स्वयंसेवक इस सम्मान से भावुक दिखाई दिए। कार्यक्रम का संचालन AMUOBA जेद्दा के महासचिव अथर रसूल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष रबनवाज खान ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उप महावाणिज्य दूत (हज) मोहम्मद जौहर अली सहित कई प्रमुख सामाजिक और शैक्षणिक हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम के अंत में आयोजित रात्रिभोज के दौरान अतिथियों और स्वयंसेवकों ने आपस में विचार साझा किए। यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि उन गुमनाम सेवाभावी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर था, जिनकी सेवाएं हजारों हज यात्रियों की यादों और दुआओं में हमेशा जीवित रहेंगी।
