erere | Source: erereनई दिल्ली। देश के बड़े रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। 12 अगस्त को संसद में पेश की गई रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर पेयजल, शौचालय, सफाई, बैठने की व्यवस्था और यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं से जुड़ी खामियों को रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जांच किए गए कई रेलवे स्टेशनों के वाटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। यह बैक्टीरिया आमतौर पर इंसानी मल में पाया जाता है और पेयजल में इसकी मौजूदगी पानी की स्वच्छता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

रेलवे स्टेशनों के पानी में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया

CAG ने अपनी रिपोर्ट में ‘भारतीय रेलवे में गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता’ के तहत रेलवे स्टेशनों की व्यवस्थाओं का ऑडिट किया। रिपोर्ट में बताया गया कि कई स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले पेयजल की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिली। कुछ स्टेशनों पर वाटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई।

ई-कोलाई एक ऐसा बैक्टीरिया है जो सामान्य रूप से इंसानी और अन्य गर्म रक्त वाले जीवों की आंतों में पाया जाता है। इसके कुछ प्रकार गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। ऐसे में पीने के पानी के नमूने में इस बैक्टीरिया का पाया जाना स्वच्छ पेयजल व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण चिंता का विषय है।

इन रेलवे स्टेशनों के पानी की हुई जांच

CAG की रिपोर्ट में जिन स्टेशनों का उल्लेख किया गया है, उनमें दक्षिणी रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ स्टेशन शामिल हैं। दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन की भी जांच की गई। मध्य रेलवे के चार स्टेशनों—छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला—को भी ऑडिट के दायरे में शामिल किया गया। इसके अलावा पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन पर भी जांच की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, इन स्टेशनों पर वाटर कूलर के पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। इससे रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले पेयजल की नियमित जांच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

पहले भी कई स्टेशनों के पानी में मिल चुका है बैक्टीरिया

CAG की रिपोर्ट में पिछले वर्षों के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022-23 के दौरान आठ रेलवे जोन के करीब 49 स्टेशनों के पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया था। इसके बाद 2023-24 के दौरान करीब 56 स्टेशनों के पानी के नमूनों में भी इस बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि रेलवे स्टेशनों पर पेयजल की गुणवत्ता से जुड़ी समस्या केवल एक वर्ष या कुछ चुनिंदा स्टेशनों तक सीमित नहीं रही है। यही वजह है कि CAG ने पानी की आपूर्ति और उसकी गुणवत्ता की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करने की जरूरत पर जोर दिया है।

512 स्टेशनों की जांच, 458 में मानकों का पालन नहीं

CAG की ऑडिट रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं से संबंधित दिशा-निर्देशों के पालन की स्थिति भी जांची गई। रिपोर्ट के अनुसार, 512 स्टेशनों की जांच के दौरान करीब 458 स्टेशन निर्धारित दिशा-निर्देशों पर खरे नहीं उतर सके।

रिपोर्ट में बताया गया कि इन 458 स्टेशनों पर एमईए या तो उपलब्ध नहीं थे या निर्धारित दिशा-निर्देशों की तुलना में उनकी संख्या कम थी। इससे यह संकेत मिलता है कि यात्रियों के लिए तैयार किए गए मानकों और जमीनी स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं के बीच अंतर बना हुआ है।

बड़े और प्रमुख स्टेशनों पर भी कमियां

आमतौर पर देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन CAG की रिपोर्ट में NSG-1 श्रेणी के कुछ बड़े स्टेशनों पर भी यात्री सुविधाओं से जुड़ी कमियां सामने आने की बात कही गई है। इनमें नई दिल्ली, सियालदह, हावड़ा, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और मुंबई सेंट्रल जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इन स्टेशनों पर साफ-सफाई और बैठने की व्यवस्था से जुड़ी कमियां पाई गईं। इसके अलावा कुछ जगहों पर डस्टबिन और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड जैसी सुविधाओं की भी कमी सामने आई। यानी देश के सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में शामिल इन स्थानों पर भी यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं को लेकर स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं मिली।

12 स्टेशनों पर पीने के पानी के नल नहीं मिले

CAG की ऑडिट जांच में NSG-1 श्रेणी के स्टेशनों पर यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता का भी आकलन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 12 स्टेशनों पर पीने के पानी के नल से जुड़ी कमी पाई गई। वहीं आठ स्टेशनों पर पंखे और आठ स्टेशनों पर वाटर कूलर से संबंधित कमियां सामने आईं।

इसके अलावा पांच स्टेशनों पर साइनबोर्ड की कमी भी दर्ज की गई। ये सुविधाएं यात्रियों के लिए सीधे तौर पर उपयोगी हैं, इसलिए इनकी उपलब्धता और सही स्थिति रेलवे स्टेशन की यात्री सुविधा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

शौचालय और सफाई व्यवस्था पर भी उठे सवाल

CAG की रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है। कई जगहों पर शौचालयों की साफ-सफाई और यात्रियों के लिए उपलब्ध अन्य स्वच्छता सुविधाओं में कमी पाई गई। रेलवे स्टेशनों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री आते-जाते हैं, ऐसे में स्वच्छ शौचालय और साफ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का महत्व और बढ़ जाता है।

रिपोर्ट में सामने आई कमियां इस बात की ओर ध्यान दिलाती हैं कि रेलवे की ओर से निर्धारित मानकों और वास्तविक व्यवस्था के बीच सुधार की जरूरत बनी हुई है।

CAG ने रेलवे को दिए सुधार के सुझाव

CAG ने केवल कमियों को उजागर नहीं किया है, बल्कि उन्हें दूर करने के लिए रेलवे को कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। रिपोर्ट में रेलवे को पानी की आपूर्ति व्यवस्था की जांच और पेयजल की गुणवत्ता की पूरी तरह जांच सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करने की सिफारिश की गई है।

CAG ने कहा है कि ‘यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वॉटर क्वालिटी प्रोटोकॉल’ के तहत पेयजल की गुणवत्ता से जुड़े सभी निर्धारित मानकों की जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों को उपलब्ध कराया जाने वाला पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो।

यात्रियों की सुविधाओं में सुधार की जरूरत

CAG की रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की नियमित निगरानी और रखरखाव की जरूरत को रेखांकित करती है। पेयजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी, शौचालयों की स्वच्छता से जुड़ी कमियां, बैठने की व्यवस्था, डस्टबिन, पंखे, वाटर कूलर और संकेतक बोर्ड जैसी सुविधाओं की कमी यात्रियों के अनुभव और सुविधा दोनों को प्रभावित कर सकती है।

देश में रेलवे आम लोगों के लिए परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण साधन है और रोजाना बड़ी संख्या में यात्री रेलवे स्टेशनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में स्वच्छ पेयजल, साफ शौचालय और जरूरी यात्री सुविधाओं की उपलब्धता केवल सुविधा का विषय नहीं बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से भी जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू है।