अगर आपकी आंखों की जांच सामान्य आती है, चश्मे का नंबर भी ठीक लेकिन फिर भी पढ़ने, चीजों को पहचानने या दूरी का सही अंदाजा लगाने में परेशानी हो रही है, तो इसे केवल आंखों की समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, कुछ मामलों में यह पोस्टीरियर कॉर्टिकल एट्रोफी (Posterior Cortical Atrophy) (PCA) नामक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है. इसे कई विशेषज्ञ अल्जाइमर रोग (Alzheimer's disease) का एक असामाकान्य (Atypical) रूप भी मानते हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि इस बीमारी में दिमाग का पिछला हिस्सा (Posterior Cortex), जो देखने और दृश्य जानकारी को समझने का काम करता है, धीरे-धीरे प्रभावित होने लगता है। इसलिए शुरुआत में समस्या आंखों में नहीं, बल्कि मस्तिष्क में होती है।

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क्या है पोस्टीरियर कॉर्टिकल एट्रोफी और कैसे पहचानें?
पोस्टीरियर कॉर्टिकल एट्रोफी (PCA) एक प्रगतिशील न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है। इसमें व्यक्ति की देखने, वस्तुओं की पहचान करने, पढ़ने, लिखने और स्थान का सही अनुमान लगाने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। शुरुआती चरण में याददाश्त सामान्य रह सकती है, इसलिए कई बार इसका पता देर से चलता है। इसके शुरुआती लक्षणों में आंखों की जांच सामान्य होने के बावजूद धुंधला या असामान्य दिखाई देना, पढ़ते समय शब्दों पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, सीढ़ियां उतरने या वाहन पार्क करने में दूरी का गलत अनुमान लगना, परिचित वस्तुओं को पहचानने में परेशानी, एक साथ कई चीजों पर ध्यान केंद्रित न कर पाना, बार-बार चीजों से टकराना, नक्शा पढ़ने या रास्ता पहचानने में कठिनाई तथा लिखने या गणना करने में परेशानी शामिल हैं।
किन लोगों में अधिक खतरा और कैसे होती है जांच?
यह बीमारी आमतौर पर 50 से 65 वर्ष की आयु के बीच शुरू हो सकती है, हालांकि इससे कम या अधिक उम्र में भी इसके मामले सामने आ सकते हैं. जिन परिवारों में न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का इतिहास है, उनमें जोखिम थोड़ा अधिक हो सकता है. हालांकि अधिकांश मामलों में इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता. डॉक्टर का कोट"कई मरीज आंखों से संबंधित शिकायत लेकर पहले आंखों के डॉक्टर के पास जाते हैं. जब आंखों की जांच सामान्य आती है, तब भी यदि देखने, पढ़ने, वस्तुओं को पहचानने या दूरी का अनुमान लगाने में लगातार समस्या बनी रहती है, तो न्यूरोलॉजिकल जांच की जरूरत हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, कई मरीज पहले आंखों से जुड़ी शिकायत लेकर नेत्र विशेषज्ञ के पास पहुंचते हैं। यदि आंखों की जांच सामान्य होने के बावजूद देखने, पढ़ने, वस्तुओं को पहचानने या दूरी का अनुमान लगाने में लगातार परेशानी बनी रहती है, तो न्यूरोलॉजिकल जांच करानी चाहिए। संदेह होने पर डॉक्टर मरीज के लक्षणों, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता का मूल्यांकन करते हैं। जरूरत पड़ने पर एमआरआई, पीईटी स्कैन और अन्य विशेष परीक्षण कराए जाते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि समस्या आंखों में है या मस्तिष्क के उस हिस्से में, जो दृश्य जानकारी को प्रोसेस करता है।
इसका इलाज क्या संभव है और कब डॉक्टर से मिलें?
फिलहाल पोस्टेरियर कॉर्टिकल एट्रोफी का कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि समय पर पहचान होने पर दवाओं, कॉग्निटिव रिहैबिलिटेशन, विजुअल थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और परिवार के सहयोग से मरीज की दैनिक गतिविधियों को आसान बनाया जा सकता है। कुछ मामलों में वही दवाएं दी जाती हैं, जिनका उपयोग अल्जाइमर रोग के कुछ मरीजों में किया जाता है, लेकिन इलाज हमेशा मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
यदि आंखों की जांच सामान्य होने के बावजूद कई सप्ताह या महीनों तक देखने में परेशानी बनी रहे, पढ़ने में कठिनाई हो, बार-बार चीजों से टकराएं, दूरी का सही अनुमान न लगा पाएं या परिचित वस्तुओं को पहचानने में दिक्कत होने लगे, तो न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। इन लक्षणों को केवल बढ़ती उम्र या कमजोर नजर समझकर टालना ठीक नहीं है। समय पर पहचान से बीमारी की बेहतर देखभाल और मरीज की जीवन गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
