पटना । राष्ट्रीय जनता दल के नेता एजाज अहमद ने अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल और सम्मान का पालन नहीं किए जाने को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बिहार में अधिकारियों और पदाधिकारियों को बार-बार प्रोटोकॉल का पालन करने, सांसदों, विधायकों और पंचायती राज प्रतिनिधियों के सम्मान का ध्यान रखने तथा उनके फोन और कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए सरकार को पत्र जारी करना पड़ रहा है। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होना सरकार के इकबाल पर सवाल खड़ा करता है।

एजाज अहमद ने कहा कि अब स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की बैठकों में भी अधिकारी शामिल नहीं हो रहे हैं। उन्होंने हाल ही में मधुबनी में हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जिला अधिकारी के सांसद और विधायकों के साथ होने वाली बैठक में शामिल नहीं होने के कारण बैठक स्थगित करनी पड़ी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि आजादी के बाद यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि किसी अधिकारी के बैठक में नहीं पहुंचने के कारण जनप्रतिनिधियों की बैठक ही स्थगित करनी पड़े।

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से यह सवाल उठता है कि क्या बिहार में ‘लोक पर तंत्र’ हावी हो गया है। यदि जनप्रतिनिधियों को ही अधिकारियों के सामने अपने सम्मान और प्रोटोकॉल के पालन के लिए संघर्ष करना पड़े तो इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होती है।

एजाज अहमद ने सवाल उठाया कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में ही अधिकारियों द्वारा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने की शिकायतें बार-बार क्यों सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को अधिकारियों को नियम और प्रोटोकॉल याद दिलाने के लिए लगातार पत्राचार करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों पर इसका असर नहीं दिख रहा है।

राजद नेता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के मान-सम्मान की लगातार अनदेखी के पीछे सरकार में बैठे बड़े नेताओं का संरक्षण भी एक कारण है। उनके अनुसार, जब अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता है तो वे जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रोटोकॉल की परवाह नहीं करते। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए उचित नहीं है।