बिहार की नौकरशाही में एक बार फिर बड़े बदलाव की दस्तक सुनाई दी है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को नई रफ्तार देने के उद्देश्य से एक साथ 427 अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला कर दिया है। ग्रामीण विकास, समाज कल्याण, सहकारिता, भवन निर्माण, स्वास्थ्य, श्रम एवं संसाधन जैसे अहम विभागों में हुए इस व्यापक फेरबदल ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। तबादलों की सूची जारी होते ही सरकारी वेबसाइट तक कुछ समय के लिए प्रभावित हो गई, जिससे इस बदलाव के पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बिहार में 427 अधिकारियों का बड़ा प्रशासनिक तबादला | फोटो: प्रतीकात्मक (AI)
ग्रामीण विकास और समाज कल्याण विभाग में सबसे बड़ा बदलाव
इस प्रशासनिक फेरबदल का सबसे अधिक असर समाज कल्याण और ग्रामीण विकास विभाग पर देखने को मिला। समाज कल्याण विभाग के 151 सीडीपीओ (Child Development Project Officer) का स्थानांतरण किया गया, जबकि ग्रामीण विकास विभाग के 68 प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं। राजधानी पटना सदर में सीमा कुमारी को नया बीडीओ नियुक्त किया गया है। सरकार का मानना है कि नए अधिकारियों की तैनाती से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और स्थानीय प्रशासन अधिक प्रभावी ढंग से काम करेगा।
बिहार स्वास्थ्य विभाग में तबादला
भवन निर्माण, स्वास्थ्य और सहकारिता विभाग में भी व्यापक फेरबदल
तबादलों की सूची केवल ग्रामीण विकास तक सीमित नहीं रही। भवन निर्माण विभाग में 30 से अधिक कार्यपालक अभियंताओं (Executive Engineers) को नई पोस्टिंग दी गई है। स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग शिक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और प्राचार्यों के स्थानांतरण के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं सहकारिता विभाग में 58 अधिकारियों का तबादला किया गया, जबकि श्रम एवं संसाधन विभाग में 117 पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं। अलग-अलग विभागों की अधिसूचनाएं जारी होने के बाद संबंधित अधिकारियों को शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

भवन निर्माण विभाग में तबादला
जून ट्रांसफर पॉलिसी की परंपरा बरकरार, प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा
बिहार में जून महीने को लंबे समय से "ट्रांसफर सीजन" माना जाता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में विभागीय स्तर पर जून में तबादले करने की जो प्रशासनिक परंपरा शुरू हुई थी, वह वर्तमान एनडीए सरकार में भी जारी है। नियम के अनुसार 30 जून तक अधिकतर विभागों में तबादलों की प्रक्रिया पूरी की जाती है, जबकि शेष मामलों में जुलाई के पहले सप्ताह तक अधिसूचनाएं जारी होती हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अंतराल पर अधिकारियों की नई तैनाती से कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ती है और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
नई पोस्टिंग से प्रशासनिक कामकाज पर क्या पड़ेगा असर?
इतने बड़े स्तर पर हुए तबादलों का असर आने वाले महीनों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर साफ दिखाई दे सकता है। नए अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में विकास योजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि, हर बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तरह इस निर्णय पर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई नियुक्तियां सरकारी कामकाज में कितनी गति और प्रभावशीलता ला पाती हैं।
