पटना: बिहार का चर्चित टेंडर घोटाला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। इस बार राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने ऐसे आरोप लगाए हैं, जिन्होंने प्रशासनिक गलियारों से लेकर सत्ता के शीर्ष स्तर तक हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया है कि कथित टेंडर घोटाले में केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि कई वरिष्ठ IAS अधिकारी भी सवालों के घेरे में हैं। उनके आरोपों ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मुद्दा दे दिया है, जबकि अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और जांच एजेंसियां आगे क्या कार्रवाई करती हैं।
राजद सांसद सुधाकर सिंह
टेंडर घोटाले पर सरकार से सीधा सवाल
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान आरोप लगाया कि बिहार में टेंडर प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ और इसमें प्रशासन के शीर्ष स्तर तक मिलीभगत रही। उन्होंने वरिष्ठ IAS अधिकारियों के नाम लेते हुए दावा किया कि उनके पास ऐसे दस्तावेज और तथ्य हैं, जो कथित अनियमितताओं की ओर इशारा करते हैं। सांसद ने यह भी कहा कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए तो कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ियां बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं हो सकतीं। उनके अनुसार यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है।
रिशु श्री मामला कैसे बना पूरे विवाद का केंद्र?
इस पूरे विवाद की जड़ में ठेकेदार रिशु श्री का नाम सामने आया है। वर्ष 2023 में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की नकदी, आभूषण और अन्य संपत्तियों का खुलासा किया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सरकारी टेंडरों में कथित फर्जीवाड़े और प्रभाव का इस्तेमाल कर बेहद कम समय में बड़ी आर्थिक संपत्ति अर्जित की गई। जांच के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की गई। इसी क्रम में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कथित संपर्क और लेन-देन की भी जांच शुरू हुई। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
ED और SVU की जांच से बढ़ी मुश्किलें, कई अधिकारी जांच के घेरे में
ईडी की जांच के आधार पर विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने भी मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया। इस दौरान कुछ अधिकारियों पर रिशु श्री के साथ कथित संपर्क, विदेश यात्राओं और अन्य सुविधाओं से जुड़े आरोप सामने आए। जांच एजेंसियों ने डिजिटल चैट, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की है। कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और निलंबन जैसे कदम भी उठाए गए हैं। हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग-अलग स्तर पर इन आरोपों का जवाब दिया गया है और कई मामलों में जांच अभी जारी है। इसलिए अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे।
जांच की दिशा पर टिकी सब की निगाहें
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए इस मुद्दे ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही से जोड़कर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से अब तक जांच प्रक्रिया पर भरोसा जताने की बात कही जा रही है! विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो इसका असर केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की राजनीतिक तस्वीर पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच एजेंसियां इस मामले को कितनी तेजी और निष्पक्षता से आगे बढ़ाती हैं तथा आरोपों पर सरकार की अगली प्रतिक्रिया क्या होती है।
