14 अगस्त 2026 को फुकेत से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट (AI2379) में आए भयानक टर्बुलेंस मामले में हर दिन नए और हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं। विमान के अचानक 300 फीट नीचे गिरने से यात्रियों में चीख-पुकार मच गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। अब इस मामले की जांच कर रही एजेंसियों के सामने एक ऐसा सच आया है, जिसने एविएशन सेक्टर में यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उड़ान के बीच आधे घंटे के लिए सो गया था पायलट

जांचकर्ताओं की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि जब विमान आसमान में था, तब पायलट-इन-कमांड करीब 30 से 35 मिनट के लिए गहरी नींद में सो गया था। जब उससे इस लापरवाही का कारण पूछा गया, तो उसने बताया कि वह पिछले कुछ समय से गंभीर निजी समस्याओं और भारी तनाव से गुजर रहा था। इस मानसिक तनाव के कारण उसे लेओवर (उड़ान से पहले रुकने के समय) के दौरान नींद नहीं आ रही थी, जिसकी कसर उसने उड़ान के दौरान विमान उड़ाते समय पूरी की।

डोप टेस्ट में मारिजुआना (गांजा) की पुष्टि

इस मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पायलट का मेडिकल टेस्ट किया गया। शुरुआती जांच के बाद जब पायलट का डोप टेस्ट कराया गया, तो उसकी रिपोर्ट मारिजुआना (गांजा) के लिए पॉजिटिव आई। यानी पायलट न सिर्फ गंभीर तनाव में था और उड़ान के दौरान सो रहा था, बल्कि वह नशे की हालत में विमान उड़ा रहा था। एक संवेदनशील कमर्शियल फ्लाइट के पायलट का इस तरह नशे में होना सैकड़ों यात्रियों की जान को सीधे खतरे में डालना था।

सुरक्षा मानकों पर सवाल और जांच तेज

इस पूरी घटना की गंभीरता को देखते हुए एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इनवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) ने संयुक्त रूप से जांच तेज कर दी है। एअर इंडिया ने भी इस पायलट पर सख्त एक्शन लेते हुए उसे तुरंत ड्यूटी से हटा दिया है। यह घटना दर्शाती है कि क्रू मेंबर्स के फ्लाइट से पहले होने वाले रूटीन मेडिकल चेकअप और उनके मानसिक स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग के नियमों को और अधिक कड़ा करने की जरूरत है।