ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (AIIMS दिल्ली) ने रविवार को अपने बड़े फैकल्टी रिक्रूटमेंट प्रोसेस के रिज़ल्ट घोषित किए। इस रिक्रूटमेंट ड्राइव में असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर तक, 460 से ज़्यादा खाली पोस्ट भरी गईं।
ये अपॉइंटमेंट AIIMS नई दिल्ली और मैदान गढ़ी में नए AIIMS-सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (CAPFIMS) कैंपस के लिए किए गए थे।
इस रिक्रूटमेंट प्रोसेस के लिए 3,200 से ज़्यादा कैंडिडेट्स ने अप्लाई किया था। इनमें से, AIIMS नई दिल्ली के लिए 265 और AIIMS-CAPFIMS कैंपस के लिए 199 पोस्ट चुने गए।
ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके रिक्रूटमेंट प्रोसेस किया गया
AIIMS ने रिक्रूटमेंट प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी और सिक्योरिटी पक्का करने के लिए पहली बार एडवांस्ड ब्लॉकचेन डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया।
कैंडिडेट्स के स्कोर को वन-टाइम पासवर्ड (OTP) का इस्तेमाल करके डिजिटली लॉक किया गया। फिर खास तौर पर डिज़ाइन किए गए सॉफ्टवेयर ने पहले से तय एल्गोरिदम के आधार पर फाइनल मेरिट लिस्ट बनाई।
इस प्रोसेस में इंसानी दखल टाई मार्क्स जैसी स्थितियों तक ही सीमित था, जिससे सिलेक्शन प्रोसेस ज़्यादा ट्रांसपेरेंट और सिक्योर हो गया। छह महीने का सिलेक्शन प्रोसेस
लगभग छह महीने तक चले इस रिक्रूटमेंट प्रोसेस में कॉन्फिडेंशियलिटी और फेयरनेस पक्का करने के लिए डिजिटल सिक्योरिटी तरीकों का इस्तेमाल किया गया।
AIIMS के मुताबिक, टेक्नोलॉजी-बेस्ड सिस्टम ने न सिर्फ रिक्रूटमेंट प्रोसेस को सिक्योर रखा, बल्कि रिजल्ट्स जल्दी घोषित करने में भी मदद की।
मेडिकल एजुकेशन और हेल्थ सर्विसेज़ मजबूत होंगी
AIIMS में बड़ी संख्या में नए फैकल्टी मेंबर्स की नियुक्ति से:
मेडिकल एजुकेशन मजबूत होगी।
पेशेंट केयर सर्विसेज़ बेहतर होंगी।
टीचर-स्टूडेंट रेश्यो बेहतर होगा।
स्पेशल हेल्थ सर्विसेज़ और मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।
इसके साथ ही AIIMS की उन्नत चिकित्सा अनुसंधान और प्रशिक्षण क्षमता भी बढ़ेगी।
दूसरे संस्थानों के लिए बन सकता है मॉडल
इतने बड़े स्तर पर सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया में ब्लॉकचेन तकनीक के सफल उपयोग को भविष्य में अन्य केंद्रीय संस्थानों की चयन प्रक्रियाओं के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा सकता है।
