बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव में 131 फीट ऊंचे मोबाइल टॉवर की कथित चोरी का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। लाखों रुपये की कीमत वाले टॉवर, डीजल जनरेटर और अन्य उपकरणों के गायब होने की शिकायत के बावजूद पुलिस ने दूसरे दिन भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की। पुलिस पूरे मामले को संदेहास्पद मानते हुए हर पहलू से जांच कर रही है।

टॉवर चोरी या कुछ और? पुलिस को कई बिंदुओं पर संदेह

जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के भूमि एवं संचालन पदाधिकारी बैद्यनाथ ओझा ने डुमरांव थाने में आवेदन देकर बताया कि वार्ड संख्या-18 स्थित कंपनी का मोबाइल टॉवर, 15 केवीए डीजल जनरेटर और अन्य तकनीकी उपकरण अज्ञात लोगों द्वारा गायब कर दिए गए हैं। शिकायत सामने आने के बाद पूरे इलाके में यह चर्चा का विषय बन गया कि आखिर 131 फीट ऊंचा टॉवर बिना किसी की नजर में आए कैसे गायब हो गया। हालांकि पुलिस का कहना है कि मामला पहली नजर में जितना सीधा दिख रहा है, उतना है नहीं। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कंपनी और जमीन मालिक के बयान से बढ़ी उलझन

प्रभारी थानाध्यक्ष अर्चना कुमारी ने बताया कि आवेदन मिलने के बाद कंपनी के प्रतिनिधि और जमीन मालिक हरेनाथ यादव को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन दोनों पक्ष थाने नहीं पहुंचे। वहीं हरेनाथ यादव ने बताया कि उनकी जमीन पर वर्ष 2010 में टॉवर लगाया गया था और इसका समझौता 2022 तक था। उनका आरोप है कि कंपनी ने 2017 के बाद किराया देना बंद कर दिया था। कई बार संपर्क और कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने यह भी कहा कि टॉवर गायब होने की जानकारी उन्हें पुलिस से ही मिली है।

कई दिनों तक रुके थे संदिग्ध लोग, फिर अचानक गायब हुआ टॉवर

स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 15 से 20 दिन पहले कुछ लोग टॉवर परिसर में पहुंचे थे और चार से पांच दिनों तक वहीं रहकर काम करते रहे। वे खाना बनाकर खाते थे और व्यवस्थित तरीके से टॉवर खोलने का काम कर रहे थे। लोगों को लगा कि वे कंपनी के अधिकृत कर्मचारी हैं, इसलिए किसी ने शक नहीं किया। बाद में जब टॉवर गायब होने और शिकायत दर्ज होने की बात सामने आई तो इलाके के लोग हैरान रह गए। फिलहाल चाय की दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक इसी मामले की चर्चा हो रही है और सभी को पुलिस जांच के नतीजों का इंतजार है।