दय्यान खान
कोलकाता:
पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में इस बार कोलकाता का चाइना टाउन खास चर्चा में है। वजह है यहां चुनाव प्रचार का अनोखा अंदाज, जहां हिंदी और बंगाली के साथ Mandarin यानी चीनी भाषा में भी राजनीतिक संदेश दिए जा रहे हैं। यह शायद पहली बार है जब चाइना टाउन का इलाका पूरी तरह चुनावी रंग में इस तरह रंगा नजर आ रहा है।
चाइना टाउन की गलियों में इस समय अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। चाइनीज रेस्टोरेंट, लाल रंग की सजावट, ‘Happy New Year 2026’ के पोस्टर और पारंपरिक चीनी संस्कृति के बीच अब चुनावी पोस्टर और राजनीतिक संदेश भी नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि इन पोस्टरों में अंग्रेजी और बंगाली के साथ Mandarin भाषा का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
यहां रहने वाले अधिकतर लोग दशकों पहले चीन से भारत आए परिवारों से जुड़े हैं। कई परिवार 70 से 90 साल पहले यहां आकर बसे थे। अब ये लोग भारतीय नागरिक हैं और चुनाव में मतदान भी करते हैं। इसी वजह से राजनीतिक दल अब इस समुदाय तक उनकी भाषा में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि खासतौर पर Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress Mandarin में प्रचार के जरिए चीन मूल के वोटर्स तक सीधी पहुंच बनाने में जुटी है। इलाके की दीवारों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे पोस्टर इस नई चुनावी रणनीति की झलक दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे चीन मूल के जरूर हैं, लेकिन भारतीय नागरिक होने के नाते चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। हालांकि पहले के मुकाबले यहां चीनी मूल की आबादी कम हुई है, लेकिन इस इलाके की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान अब भी मजबूत बनी हुई है।
चाइना टाउन सिर्फ राजनीतिक वजहों से नहीं, बल्कि अपनी अनोखी सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। यहां मौजूद चाइनीज काली मंदिर इसकी मिसाल है, जहां चीन मूल के लोग भी माता काली की पूजा करते हैं। मंदिर के बोर्ड पर Mandarin में लिखे शब्द इस इलाके की सांस्कृतिक पहचान को और खास बनाते हैं।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक समझ और स्थानीय पहचान के जरिए वोटर्स से जुड़ने की कोशिश भी है। फिलहाल कोलकाता का चाइना टाउन चुनावी रणनीति और सांस्कृतिक विविधता के इस अनोखे मेल को लेकर चर्चा में बना हुआ है।
